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उज्जैन जिले में एक युवक को झूठे केस में फंसाने के लिए एक बाप ने ऐसा षड्यंत्र रचा कि अपनी ही बेटी के पैरों में गोली मारकर वह बेटी को न सिर्फ इलाज कराने के लिए अस्पताल ले गया, बल्कि उसने थाने पहुंचकर युवक को इस घटना का दोषी भी बताया, लेकिन चिमनगंज थाना पुलिस ने इस मामले में जांच की और यह पता कर लिया कि इस घटना का षड्यंत्रकर्ता कोई और नहीं बल्कि घायल लड़की का बाप ही है, जिसने इस घटनाक्रम को अंजाम दिया.

यह पूरी घटना चिमनगंज थाना क्षेत्र की है. चिमनगंज थाने के एसआई आरबी सिंह चौहान ने बताया कि 31 मार्च 2018 को मंगल नगर में रहने वाले रतनलाल पिता भेरुलाल मुंडिया (40) ने थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई थी कि रात्रि के समय चंचल नाम का युवक उनके घर पर पहुंचा और उसने उनकी तीसरी क्लास में पढ़ने वाली 7 वर्षीय बेटी तुलसी पर बंदूक से हमला कर दिया, जिससे उसके पैरों में गंभीर चोट आईं.

शिकायत के बाद जब कार्रवाई की गई तो पूरा मामला इसके उलट ही निकला. जांच के दौरान पता चला कि रतनलाल मुंडिया का चंचल और उसके पिता से पुराना किसी बात को लेकर विवाद चल रहा है. इसीलिए रतनलाल ने अपनी मासूम बेटी के पैरों में खुद गोली मारी और इस जानलेवा हमले में चंचल को फंसाने के लिए वह उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाने थाना चिमनगंज भी पहुंच गया.

विशेष न्यायाधीश ने सुनाई 3 साल की सजा

कुलदीप सिंह भदोरिया मीडिया सेल प्रभारी ने बताया कि गैर इरादतन हत्या का यह मामला विशेष न्यायाधीश पवन कुमार पटेल की कोर्ट में चल रहा था, जिसमें माननीय न्यायाधीश ने सभी पक्ष सुनने के बाद रतनलाल को दोषी ठहराते हुए उसे 3 साल की सजा सुनने के साथ ही 5000 का जुर्माना भी वसूला है.

फैसला आया तो सभी के उड़ गए होश

यह ऐसा मामला था, जिसमें कोई भी यह नहीं सोच रहा था कि पूरे मामले का षड्यंत्रकरत रतनलाल निकलेगा. भले ही इस मामले में 7 सालों बाद कोर्ट ने फैसला दिया हो, लेकिन इस फैसले के आने के पहले तक कोई भी यह नहीं सोच सकता था कि किसी युवक को झूठे केस में फंसाने के लिए कोई बाप अपनी ही 7 वर्षीय मौसम बेटी के पैरों में गोली मारने जैसा कदम भी उठा सकता है. बताया जाता है कि इस मामले में चिमनगंज थाना पुलिस ने ऐसे ठोस सबूत पुलिस के सामने पेश किए थे कि माननीय न्यायाधीश इन तर्कों से सहमत हो गए और उन्होंने आरोपी रतनलाल को यह सजा सुना दी.

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