गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है. इस दिन गणपति बप्पा की स्थापना कर 10 दिनों तक उनका पूजन किया जाता है. परंपरा है कि गणेशजी को मोदक और लड्डू के साथ 21 पत्तों (पत्रों) से पूजा की जाती है, जिसे पत्र पूजा कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार इन पत्तों का अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. माना जाता है कि 21 पत्र अर्पित करने से विघ्नहर्ता गणपति जल्दी प्रसन्न होकर भक्तों के जीवन से संकट दूर करते हैं और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं.
21 पत्र अर्पित करने की परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि इसमें गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है. हर पत्ता एक विशेष शक्ति, गुण और आशीर्वाद का प्रतीक है.जैसे दूर्वा समृद्धि का, शमी विजय का, बेल पवित्रता का और धतूरा उग्र शक्तियों को शांत करने का प्रतीक है. खास बात यह है कि सामान्य दिनों में गणपति को तुलसी पत्र नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन गणेश चतुर्थी पर इसे शुभ माना जाता है.
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