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देवशयनी एकादशी के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, हर इच्छा हो जाएगी पूरी!

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देवशयनी एकादशी, हिंदू धर्म में खासतौर पर वैष्णव संप्रदाय के लिए बहुत ही शुभ दिन है. यह अत्यंत पवित्र एकादशी आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पड़ती है. इसे आषाढ़ी एकादशी, महा एकादशी, पद्मा एकादशी, सर्वपापहारी एकादशी और हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है. इसे सभी एकादशियों में से सबसे पवित्र माना जाता है. इस साल देवशयनी एकादशी 6 जुलाई 2025 को मनाई जा रही है. देवशयनी एकादशी चातुर्मास की शुरुआत का भी प्रतीक है. भक्त इस दिन व्रत रखकर विधिपूर्वक पूजा करते हैं. इस दिन एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना भी बहुत पुण्यदायी माना गया है. ऐसे में चलिए पढ़ते हैं देवशयनी एकादशी की व्रत कथा.

देवशयनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में एक मांधाता नामक चक्रवर्ती और न्यायप्रिय राज थे. वे अपनी प्रजा को अपनी संतान मानकर उनकी सेवा करते थे. एक बार राजा के राज्य में भंयकर अकाल पड़ा गया. लगातार तीन सालों तक बारिश न होने के कारण चारों तरफ सूखा पड़ गया. न तो लोगों के पास खाने के अनाज बचा न पशु-पक्षियों के लिए चारा बचा था.

ऐसे में यज्ञ, हवन, पिंडदान, कथा-व्रत आदि की भी कमी हो गई थी. यह देख पूरी प्रजा अपनी समस्या लेकर राजा के पास पहुंची और उनकी समस्या सुन राजा भी दुखी हुए. इस समस्या का समाधान पाने के लिए एक दिन राजा जंगल की ओर चल दिए. जंगल में चलते हुए राजा मांधाता, ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचे.

अंगिरा ऋषि ने राजा के आने कारण पूछा तो उन्होंने पूरी बात बताई और इस समस्या का समाधान मांगा. तब अंगिरा ऋषि ने कहा कि तुम्हारे राज्य में एक शुद्र तपस्या कर रहा है, लेकिन उसे इसका अधिकार नहीं है. इसी कारण तुम्हारे राज्य में अकाल पड़ रहा है. ऐसे में उसे मारने से ही इस समस्या का समाधान हो पाएगा.

यह सुन संकोच में पड़ गए, क्योंकि राजा मांधाता एक निरपराधी शूद्र को मारने को तैयार नहीं थे. फिर अंगिरा ऋषि ने कहा कि अगर तुम आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का व्रत करते हो तो भी तुम्हारी समस्याएं दूर हो सकती हैं.‘ ऋषि की बात सुनकर राजा अपने राज्य में लौट और फिर उन्होंने पूरी प्रजा के साथ ये व्रत किया.

ऐसा माना जाता है कि इसी व्रत के फलस्वरूप उनके राज्य में मूसलाधार बारिश हुई और दोबारा पूरा राज्य धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया. ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक, जो भी व्यक्ति देवशयनी एकादशी की इस कथा को सुनता है या पाठ करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

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