Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
क्या भारत में नागरिकों को हासिल है पूरी आजादी? जानिए संविधान प्रदत्त 11 अधिकारों के साथ जुड़ी अहम का... क्या NDA में होगा बड़ा विस्तार? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बीच DMK, NCP और अकाली दल के साथ आने क... महाराष्ट्र के सांगली में बड़ा हादसा: रेणावी घाट में दो ST बसों की आमने-सामने भीषण टक्कर स्वतंत्रता दिवस 2026: दिल्ली मेट्रो की विशेष व्यवस्था, लाल किला और जामा मस्जिद के लिए सुबह 4 बजे से ... अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत परमहंस रामचंद्र दास के स्मृति समारोह में हुए शामिल 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, देशवासि... PM मोदी और विदेश नीति पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी को घेरा,... CJI सूर्य कांत विवाद के बाद सुर्खियों में NALSAR यूनिवर्सिटी, BCI ने वापस लिया निलंबन फैसला 4,200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब 15 अगस्त को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस, लाल किले पर समारोह के दौरान मौसम पर टिकीं निगाहें

बागेश्वर धाम का वो मंदिर जहां आज तक नहीं जला कोई बल्ब… जलाते ही हो जाता है फ्यूज!

43

बागेश्वर धाम सरकार के मंदिर की चर्चा देश-विदेश में होती है. सदियों पुराना ये मंदिर पहली बार साल 2012 में चर्चा में आया और इसका प्रचार-प्रसार लगभग 2016 में हुआ. बागेश्वर धाम में जब आप बालाजी हनुमान के दर्शन के लिए जाते वक्त परिक्रमा मार्ग में एक मंदिर आता है. इस मंदिर को धाम की नींव माना जाता है. यह मंदिर महादेव का है और उनका नाम है बागराज महाराज.

आज भी इस मंदिर के गर्भ गृह में पूजा की जाती है. इस मंदिर से जुड़ी कई कहानियां और किस्से यहां के आम लोगों की जुबान पर हैं. उनका मानना है कि ये कोई आम तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि एक सिद्ध स्थान है जिसे संन्यासी बाबा नाम के एक संत ने अपनी तपस्या से सिद्ध किया था. वह इस शिवलिंग की रोज पूजा करते थे और यहीं उन्होंने सिद्धियों को प्राप्त किया था. वो यहीं से आम लोगों का कल्याण करते थे.

मंदिर में आज तक नहीं जला बल्ब

इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1986 में किया गया. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां में श्रद्धा के दीपक के अलावा कोई अन्य वस्तु उजाला नहीं कर सकती यानी सिर्फ और सिर्फ दिए की रोशनी या भगवान सूर्य का प्रकाश ही इस मंदिर को प्रकाशित कर सकता है. इस मंदिर में आज तक कोई बल्ब नहीं लगाया गया है.

इसके गर्भ गृह में जब भी बल्ब लगाने का प्रयास किया गया तो वह फ्यूज हो गया. माना जाता है कि भगवान उसे स्वीकार नहीं करते. लोगों का मानना है कि ऐसा नहीं कि गर्भ गृह में बल्ब लगाने का प्रयास नहीं किया गया. जब भी इस मंदिर में बल्ब लगाया गया तो जलाते वक्त वह फ्यूज हो गया.

इस मंदिर को क्यों कहते थे बागराज महाराज

लोगों का कहना है कि 300 साल पहले इस मंदिर की नींव रखी गई थी, तब ये जंगलों से घिरा था. यहां अकसर बाघ आ जाया करते थे. यही कारण था कि यहां विराजने वाले महादेव को बागराज महाराज का नाम दिया गया. आज भी ये मंदिर लोगों की आस्थास्थली है. भक्तों का कहना है कि यहां मांगी उनकी हर मुराद पूरी होती है. इस मंदिर में आज भी संन्यासी बाबा जल चढ़ाने आते हैं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.