Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में बाल-बाल बची टीम इंडिया, बारिश और DLS नियम के सहारे 4 रन से जीता म... दिवाली 2026 पर घर लाएं सही लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, जानें खरीदने और स्थापना के जरूरी नियम सोनिया गांधी का बड़ा खुलासा, बाबरी ढांचा गिरते देख रो पड़ी थीं— इंदिरा गांधी की इमरजेंसी को माना गलत... अयोध्या दौरे पर जाएंगे सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राम मंदिर में माथा टेकने की तारीख तय— राजनीतिक हलचल त... इंदौर में दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट पर प्रशासन का शिकंजा, इन चार चर्चित गानों की प्रस्तुति पर लगाई र... दुबई में हार्ट अटैक के बाद अनूपपुर के ज्ञानेंद्र तिवारी की वतन वापसी, एयर एंबुलेंस से दिल्ली एम्स मे... मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक 'समझदार भैंस' ने अपनी गजब की सूझबूझ से नाकाम किए चोरों के मंसूबे,... उज्जैन में रेलवे बायपास लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध, 5 गांवों के किसानों ने सर्वे टीम को लौटा... एमपी में मौसम का मिजाज बदला, रात के तापमान में गिरावट से बढ़ी ठिठुरन— 10 नवंबर से नया विक्षोभ सक्रिय विदिशा में मौजूद है भगवान कुबेर की 2200 साल पुरानी 12 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा, धनतेरस पर उमड़े श्रद्ध...

पक्की सड़क, Wi-Fi, CCTV और एंबुलेंस! बिहार का ऐसा गांव… जिसे लोगों ने बना दिया स्मार्ट; कतर, इंग्लैंड, अमेरिका से आ रहा पैसा

35

बिहार के मधुबनी जिले में एक ऐसा गांव है, जो सिर्फ नाम के लिए गांव है. लेकिन इस गांव में एक स्मार्ट सिटी की तरह सभी सुविधाएं मौजूद हैं. इस गांव में स्मार्ट स्कूल से लेकर एंबुलेंस की सुविधा, वाई-फाई, सीसीटीवी कैमरा समेत हर जरूरी सुविधा हैं. खात बात ये है कि ये सुविधाएं गांव वालों को सरकार की ओर से नहीं दी गई हैं. बल्कि इस गांव को स्मार्ट सिटी में बदलने का काम खुद गांव के लोगों ने ही किया है.

इस गांव का नाम सतघरा है.इस गांव के लोग अब दूसरों के लिए उदाहरण बन रहे हैं, जिन्होंने अपने गांव को महज दो साल में एक नया रूप दिया है. दो साल पहले तक इस गांव के विदेश में रहने वाले लोग जब गांव आते तो उनका मन गांव की स्थिति देखकर दुखी हो जाता था. ऐसे में उन्होंने फैसला किया कि वह मिलकर गांव का विकास करेंगे.

सतघरा विकास फाउंडेशन

अमेरिका में गूगल कंपनी में काम करने वाले सुनील कुमार झा और अमेरिका में ही एक कंपनी में सीईओ संजय कुमार झा दोनों ने गांव की स्थिति को लेकर सूरत में रहने वाले अपने दोस्त अरविंद चौधरी से बात की, जो एक इन्फास्ट्रक्चर डेवलपर हैं. ऐसे में सतघरा विकास फाउंडेशन शुरू किया गया और अलग-अलग देशों में रहने वाले वाले सतघरा गांव के लोग इस फाउंडेशन से जुड़ गए.

इंग्लैंड, कतर और बहरीन से जुड़े

सतघरा विकास फाउंडेशन से इंग्लैंड, कतर और बहरीन समेत अलग-अलग देशों से लोग फाउंडेशन से जुड़े. इसमें गांव के जिम्मेदार लोगों को भी शामिल किया गया. इस तरह गांव के लोगों ने मिलकर गांव का विकास किया. अब सतघरा में बुजुर्गों के लिए एक रसोई घर में हैं, जिसमें वह खाना खा सकते हैं. गांव में 7 योजनाओं के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं.

फ्री मेडिकल कैंप की सुविधा

फाउंडेशन की ओर से गांव में हर रविवार को एक फ्री मेडिकल कैंप लगाया जाता है, जिसके चलते अब गांव के लोगों को इलाज की भी आसानी हो गई है. गांव में एक प्लस टू और दो प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें सतघरा विकास फाउंडेशन की ओर 6 लाख रुपये की लागत लगाकर स्मार्ट क्लास तैयार की गई है. ये काम कमजोर और जरूरतमंद बच्चों के लिए किया गया है. इसमें हर तरह प्रोजेक्टर से लेकर कंप्यूटर और इनवर्टर तक की सुविधा है.

सतघरा विकास फाउंडेशन का अपना एक व्हाट्सएप ग्रुप है, जिसमें गांव के सभी लोग एड हैं. गांव में होने वाली समस्या और उसके समाधान पर इसी ग्रुप में चर्चा होती है. फिर 18 सदस्यीय एक कोर कमेटी इस पर संज्ञान लेती है. इसके बाद फैसले के बारे में गांव वालों को बताया जा जाता है. सतघरा विकास फाउंडेशन का एक बैंक अकाउंट भी है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.