Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जारी किया 10वीं-12वीं परीक्षा 2027 का शेड्यूल: जानें फॉर्म भरने और फीस ज... Sonari Police Station Case: पूनम अरोड़ा, सन्नी और सक्षम अरोड़ा के खिलाफ प्राथमिकी, व्हाट्सएप चैट और ... Singrauli Collector Initiative: एलन और आदित्य बिड़ला ग्रुप के सहयोग से छात्रों को मिलेगी सौगात, दूरद... Rahul Gandhi vs ECI: वोट चोरी के मुद्दे पर चुनाव आयोग जाने से रोके गए राहुल गांधी, पुलिस ने कई नेताओ... Prayagraj Poster Politics: दलित-पिछड़ा साथ चलेगा और फिर बनेगी योगी-मोदी की सरकार, चुनाव से पहले शहर ... Moradabad Police Action: आरोपी अरबाज खान गिरफ्तार और जेल भेजा गया, युवती को गांव के बाहर छोड़कर हुआ ... Allahabad HC Verdict: मां के साथ नहीं रहना चाहती थी बेटी, कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को किया... Ruchi Vira on Yogi Adityanath: अखिलेश यादव के विकास कार्यों पर मांगे जाएंगे वोट, ओवैसी और संजय निषाद... Vikram Patna Crime Update: आपसी नोकझोंक के बाद सनसनीखेज वारदात, एफएसएल टीम ने घटनास्थल से जुटाए साक्... Rajasthan Crime Update: पाली में ट्रांसपोर्ट नगर के पास ढाबे पर खूनी संघर्ष, कर्मचारियों से मारपीट क...

माता-पिता की हुई मौत, अब दर-दर भटक रहे 9 साल का शिवम और 7 साल की शिवानी… नहीं मिली कोई मदद

51

बिहार के मोकामा में मेकरा नाम की एक पंचायत है. यहां दो मासूम भाई-बहन रोटी के लिए दर दर भटक रहे हैं. भाई शिवम की उम्र 9 वर्ष और उसकी छोटी बहन शिवानी की उम्र 7 वर्ष बताई जा रही है. दरअसल, इनके माता-पिता की मौत पहले हो चुकी है. इसके बाद चाचा ने इनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाली. हालांकि, कुछ समय बाद उनकी हालत भी खराब हो गई. आय का साधन नहीं होने से बच्चे रिश्तेदारों के यहां घूमने को मजबूर हुए और अब बेसहारा हो चुके हैं.

दोनों बच्चों की माता संजुला देवी की मौत 2 साल पहले प्रसव के दौरान हो गई थी. वहीं, पिता दुखहरन राय की भी मौत पिछले साल हुई बीमारी के कारण हो गई. माता-पिता कि मौत के बाद बच्चे इधर उधर भटक रहें हैं. कोई इनकी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है. बच्चे एक-एक रोटी को मोहताज हैं.

शुरुआती दिनों में मेहनत मजदूरी करके उनके गरीब चाचा नेपाली कुमार ने जिम्मेदारी संभालना शुरू किया, लेकिन कुछ ही समय बाद वह भी असमर्थ होने लगे. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चों का कोई ठिकाना नहीं है. छोटी सी शिवनी रिश्तेदारों के घर भटक रही है.

काई भी नहीं कर रहा मदद

इन दो अनाथ बच्चों के हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिश्तेदारों ने भी इनके भरण पोषण से हाथ पीछे खिच लिया है. हर तरफ से मिल रहे तिरस्कार ने बच्ची को फिर से अपने चाचा के पास पहुंचा दिया है. यानी 10 दिन पहले बच्ची फिर से अपने चाचा के घर पहुंची है.

इधर 9 साल का शिवम प्राथमिक विद्यालय में चौथी कक्षा का छात्र है, लेकिन वह स्कूल से विमुख है. महज 9 साल की उम्र में ही वो अपने गरीब चाचा की काम में मदद करता है, जिससे उसका पेट पल पा रहा.

नहीं मिल पा रही सरकारी मदद

बच्चों के चाचा ने बताया कि इन अनाथ बच्चों का कोई सहारा नहीं है. इन बच्चों को सरकारी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने बताया कि वह सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट कार थक चुके हैं, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ.

नेपाली कुमार ने आगे बताया कि इन दोनों के माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बना है, जबकि उनकी मृत्यु दो साल पहले हो चुकी है. इसको लेकर वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. कभी आवेदन में गलती तो कभी कुछ और कारण बताकर उनको वापस कर दिया जाता है.

प्रशासन ने दिया आश्वासन

समाज के कुछ लोगों ने इस मामले को लेकर अधिकारी से बात की है. उन्हें आश्वासन दिया गया है कि बच्चों के माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द जारी किया जाएगा. साथ ही बाल संरक्षण विभाग को भी मामले की जानकारी देने की बता कही गई, ताकि इन बच्चों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके.a

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.