Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

भगवान जगन्नाथ को क्यों लगाया जाता है मालपुए का भोग? जानें कहां बनता है ये भोग

26

जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली भव्य रथ यात्रा जल्द ही शुरू होने वाली है. इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लोग यहां आते हैं. इस यात्रा की शुरुआत हर साल आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से होती हैं. जो कि इस साल 27 जून से होगी. इस पावन अवसर पर भगवान को कुछ विषेश प्रकार का भोग अर्पित किया जाता है. इसे महाभोग कहा जाता है. भगवान जगन्नाथ को मालपुए का भोग लगाया जाता है, उसके बाद ही यात्रा प्रारंभ होती है.

भगवान जगन्नाथ को मालपुए का भोग

कहते हैं कि भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर हर साल अपनी मासी की घर जाते हैं. दशकों पुरानी इस परंपरा के अनुसार, खलासी समुदाय के सदस्य भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का रथ खींचते हैं. भगवान जगन्नाथ को मालपुआ अति प्रिय हैं इसलिए यात्रा के दिन भ उन्हें विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया जाता है.

कहां से आता हैं प्रभु जगन्नाथ का भोग?

भगवान जगन्नात के लिए यह मालपुआ छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से लाकर भगवान को अर्पित किया जाता है. इस प्रसाद को पाने के लिए भक्त घंटों कतार में खड़े रहते हैं. मालपुआ सिर्फ यात्रा के दिन ही बनाया जाता है और भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटा जाता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.