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सैमसंग का ग्लोबल प्रोडक्शन हब बन रहा भारत, एप्पल अभी भी चीन भरोसे

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बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट ने खुलासा किया कि सैमसंग भारत में अपने ग्लोबल वॉल्यूम के हिसाब से एप्पल से ज्यादा स्मार्टफोन असेंबल करता है। ये खबर सुनकर चौंक गए ना? दरअसल, सैमसंग और एप्पल, दोनों ही टेक की दुनिया के दिग्गज हैं, लेकिन भारत में स्मार्टफोन बनाने की रेस में सैमसंग ने बाजी मार ली है। तो चलिए, जानते हैं कि कैसे सैमसंग ने भारत में एप्पल को पछाड़ दिया.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, S&P ग्लोबल की स्टडी में ये बात सामने आई है कि FY24 में सैमसंग ने अपने ग्लोबल स्मार्टफोन असेंबली का 25 फीसदी हिस्सा भारत में पूरा किया. वहीं, एप्पल का इस मामले में हिस्सा सिर्फ 15 फीसदी रहा. यानी, सैमसंग भारत में एप्पल से डेढ़ गुना ज्यादा फोन बना रहा है.

ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, भारत, जो पहले सिर्फ स्मार्टफोन खरीदने वाला मार्केट माना जाता था, अब टेक कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है. लेकिन सवाल ये है कि फिर भी सैमसंग को उतनी वाहवाही क्यों नहीं मिलती, जितनी एप्पल को मिलती है?

एप्पल को क्यों मिलती हैं ज्यादा सुर्खियां?

रिपोर्ट कहती है कि सैमसंग को एप्पल जितना क्रेडिट नहीं मिलता, क्योंकि एप्पल की एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी ज्यादा ‘एग्रेसिव’ है. मतलब, एप्पल भारत से बनाए गए अपने फोन को बड़े पैमाने पर विदेशों में बेचता है, जिससे उसकी वैल्यू और विज़िबिलिटी बढ़ती है. दूसरा, एप्पल के फोन की कीमत भी ज्यादा होती है, तो उनकी असेंबली की वैल्यू भी ज्यादा गिनी जाती है. यानी, सैमसंग भले ही ज्यादा फोन बना रहा हो, लेकिन एप्पल के फोन की चमक-दमक और उनके मार्केटिंग के दम पर सारा लाइमलाइट वो ले जाता है. सैमसंग के लिए ये थोड़ा ‘कर तो हम ज्यादा, लेकिन ढूंढोरा कोई और पीटे’ वाला मामला है।

भारत में सैमसंग का दबदबा

अब अगर बात करें सैमसंग के ग्लोबल ऑपरेशन्स की, तो भारत भले ही उनके लिए अहम हो, लेकिन उनका सबसे बड़ा असेंबली हब है वियतनाम. वियतनाम में सैमसंग अपने ग्लोबल स्मार्टफोन का 55 फीसदी हिस्सा बनाता है. यानी, भारत अभी भी वियतनाम से पीछे है. तीसरे नंबर पर है ब्राजील, जहां सैमसंग 12 फीसदी फोन असेंबल करता है. तो सैमसंग का ग्लोबल प्रोडक्शान, भारत, वियतनाम, और ब्राजील में फैला हुआ है, लेकिन भारत में उनका फोकस बढ़ता जा रहा है. ये भारत के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि सैमसंग जैसे दिग्गजों का यहां निवेश करने का मतलब है ज्यादा नौकरियां और इकॉनमी में बूस्ट.

चीन से एप्पल का मोह अभी छूटा नहीं

वहीं, एप्पल की बात करें तो उनके लिए अभी भी चीन सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है. S&P ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल के 75% से ज्यादा आईफोन अभी भी चीन में बनते हैं. भारत में भले ही एप्पल ने प्रोडक्शन बढ़ाया हो, लेकिन चीन से उनका मोह अभी छूटा नहीं. ब्राजील में एप्पल का हिस्सा सिर्फ 2 फीसदी है, यानी वो वहां नाममात्र के लिए ही फोन बनाते हैं. लेकिन भारत में एप्पल की मौजूदगी धीरे-धीरे बढ़ रही है, और सरकार भी उन्हें और ज्यादा प्रोडक्शन के लिए प्रोत्साहित कर रही है. तो ऐसा हो सकता है कि आने वाले सालों में ये प्रोडक्शन के मामले में सैमसंग को पीछे छोड़ सकता है.

अमेरिका में क्यों नहीं बनते फोन?

एक मजेदार बात ये है कि न तो सैमसंग और न ही एप्पल अपने फोन अमेरिका में बनाते हैं. दुनिया का सबसे बड़ा टेक मार्केट होने के बावजूद, दोनों कंपनियां अपने प्रोडक्शन के लिए एशिया और लैटिन अमेरिका पर निर्भर हैं. इस बात से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खासे नाराज़ भी रहते हैं. उन्होंने सैमसंग और एप्पल को अमेरिका में फोन बनाने के लिए कहा और ऐसा न करने पर 25 फीसदी इम्पोर्ट टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है. लेकिन लगता है, ये धमकी अभी तक काम नहीं आई, क्योंकि दोनों कंपनियां अभी भी अपने प्रोडक्शन को पूरी तरह अमेरिका में शिफ्ट करने के मूड में नहीं हैं.

भारत का एप्पल पर दांव

पिछले महीने मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्टर में बताया था कि भारत सरकार चाहती है कि एप्पल भारत में अपना प्रोडक्शन और बढ़ाए. इसके लिए सरकार ने एक नई इलेकट्रॉनिक्स कंपोनेंट स्कीम लॉन्च की है, जिसके जरिए एप्पल को लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने में मदद मिलेगी. ये स्कीम भारत के लिए अहम है, क्योंकि अगर एपप्पल जैसे दिग्गज यहां ज्यादा निवेश करें, तो न सिर्फ नौकरियां बढ़ेंगी, बल्कि भारत टेक मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बन सकता है। लेकिन ट्रंप की टैरिफ की धमकी के बीच, एप्पल के लिए ये फैसला आसान नहीं है.

आईफोन 17 को लेकर क्या है प्लान

मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक, एप्पल 2025 में अपने आईफोन 17 के प्रो मॉडल्स का प्रोडक्शन भारत में बढ़ाने की योजना बना रहा है. इसका मकसद है अमेरिका में बढ़ती डिमांड को पूरा करना. टिम कुक की अगुवाई में एप्पल भारत को अपने ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाना चाहता है. लेकिन अभी ये देखना बाकी है कि क्या वो भारत में सैमसंग को टक्कर दे पाएंगे, जो पहले से ही यहां मजबूत पकड़ जमाए हुए हैं.

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