Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

पूर्व सचिव एचसी गुप्ता बरी, JICPL कम्पनी और डायरेक्टर ही निकले दोषी

61

झारखंड कोयला घोटाले के मामले में आया बड़ा फैसला. दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने झारखंड के महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता (Irregularity) के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता, संयुक्त सचिव केएस क्रोफा और कोयला आवंटन निदेशक केसी समारिया को बरी कर दिया है.

वहीं मेसर्स जस इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड (JICPL) और इसके डायरेक्टर मनोज कुमार जायसवाल को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी पाया गया है. स्पेशल सीबीआई जज संजय बंसल की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. केस में दोषियों की सजा पर बहस 8 जुलाई को होगी. सीबीआई के अनुसार कोयला घोटाला मामलों में यह 19वीं सजा है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2006-09 के दौरान कोयला मंत्रालय द्वारा निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार से जुड़ा है. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया था. जांच में पाया गया कि JICPL और इसके डायरेक्टर मनोज जायसवाल ने महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी दी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया. इससे कंपनी को अनुचित लाभ मिला.

कोर्ट की कार्यवाही और सबूत

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी में इस मामले की जांच हुई. सीबीआई ने ट्रायल के दौरान 18 गवाहों की जांच की और ठोस सबूत पेश किए. कोर्ट ने पाया कि JICPL और मनोज जायसवाल ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध किया है. हालांकि पूर्व अधिकारियों के खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं पाए गए, जिसके चलते उन्हें बरी कर दिया गया.

क्या है कोयला घोटाला?

कोयला घोटाला जिसे कोलगेट के नाम से भी जाना जाता है. यह 2000 के दशक में कोयला ब्लॉकों के आवंटन में अनियमितताओं का मामला है. इसमें निजी कंपनियों को गलत तरीके से कोयला ब्लॉक आवंटित करने के आरोप लगे थे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ. इस घोटाले की जांच सीबीआई ने की और कई मामलों में सजा भी सुनाई गई. इस मामले में भी JICPL और मनोज जायसवाल की सजा पर 8 जुलाई 2025 को होने वाली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.