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BMC कॉन्ट्रैक्टर जोशी को ED ने हिरासत में लिया, कांदिवली फ्लैट पर 10 घंटे चली रेड

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मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कॉन्ट्रैक्टर जय जोशी के खिलाफ लिया बड़ा एक्शन. कांदिवली की IBIS सोसाइटी में फ्लैट नंबर 2702 और 2703 में ईडी ने करीब साढ़े 10 घंटे तक छापेमारी की. इस दौरान वहां पांच ईडी अधिकारी मौजूद थे, जो अपने साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स लेकर गए. छापेमारी के बाद जय जोशी को ईडी ने हिरासत में ले लिया.

जय जोशी पर मीठी नदी सफाई घोटाले में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का गंभीर आरोप है. इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने पहले ही जय जोशी को गिरफ्तार किया था. हाल ही में ईओडब्लू कोर्ट से जय जोशी को जमानत मिली थी, लेकिन उसी इनपुट के आधार पर ईडी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यह छापेमारी की. सूत्रों के अनुसार ईडी को इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की जांच चल रही है.

घोटाले का पर्दाफाश

मीठी नदी की सफाई के नाम पर हुए इस घोटाले में करोड़ों रुपये की अनियमितताएं (Irregularities) सामने आई हैं. आरोप है कि जय जोशी ने BMC के साथ मिलकर फर्जी बिलिंग और गलत तरीके से फंड का इस्तेमाल किया. ईओडब्लू की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे, जिसके बाद ईडी ने इस मामले को गंभीरता से लिया. ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस घोटाले से मिले पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया है.

क्या है पूरा मामला?

जय जोशी पर आरोप है कि मीठी नदी की सफाई के लिए मिले फंड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई. इस घोटाले में न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इसे अन्य जगहों पर निवेश करने की बात भी सामने आई है. ईडी की छापेमारी में जब्त किए गए दस्तावेज और गैजेट्स से इस मामले में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

जोशी केवल एक ‘मशीन सप्लायर’ हैं: वकील

ईडी अब जय जोशी से पूछताछ कर रही है ताकि इस घोटाले के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके. जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या इस मामले में और भी लोग शामिल हैं. हालांकि जोशी के वकीलों ने अदालत को यह बताया कि वे केवल विर्गो स्पेशलिटीज के मालिक हैं. उनका (जोशी) बीएमसी अधिकारियों के साथ कोई सीधा व्यवहार नहीं था और वह केवल एक ‘मशीन सप्लायर’ थे. इन मशीनों को उनकी कंपनी ने नीदरलैंड से मंगवाया था और उन्हें निजी ठेकेदारों को पट्टे पर दिया गया था.

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