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एक पंडाल में 2 धर्मों की शादी, बारिश से मंडप में भरा पानी; मुस्लिम परिवार ने शामियाने में कराया विवाह

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महाराष्ट्र के पुणे जिले के वानावाड़ी स्थित एसआरपीएफ के अलंकार लॉन में दो परिवारों, कावड़े और गलांडे, का विवाह समारोह चल रहा था. लॉन को सुंदर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था. सभी मेहमान इकट्ठे हो गए थे. खाने की मेजों पर भी मेहमानों की भीड़ लगने लगी थी. यहां तक ​​कि पंडित भी मुख्य विवाह समारोह की तैयारी कर रहे थे. जैसे ही दूल्हा-दुल्हन तैयार होकर मंडप में पहुंचे, भारी बारिश शुरू हो गई. जिस लॉन में शादी समारोह होना था, वहां भारी बारिश के कारण अचानक पानी भर गया. मेहमान, रिश्तेदार, दूल्हा और दुल्हन के माता-पिता भी बारिश में भीग गए. तो सवाल यह उठा कि शादी की रस्म कैसे पूरी की जाए. दुल्हन के पिता को आश्चर्य हो रहा था कि वह अपनी प्यारी बेटी की शादी इस बारिश में धूमधाम से करने का सपना कैसे पूरा कर पाएंगे.

ऐसी स्थिति में एक पिता को दूसरे पिता से बहुमूल्य सहायता मिली. दिलचस्प बात यह है कि मदद करने वाले लोग न तो उनकी जाति के थे और न ही धर्म के. जिस लॉन में इस मराठी परिवार का विवाह होना था, उसके बगल वाले हॉल में मुस्लिम नवविवाहित जोड़े का स्वागत समारोह चल रहा था. यह महसूस करते हुए कि उनकी बेटी की शादी के लिए हॉल के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था, कावड़े परिवार ने पड़ोसी हॉल में रहने वाले फारूक काजी को स्थिति के बारे में बताया. इसके बाद काजी ने तुरंत नवदंपत्ति को मंच से उतरने को कहा और स्वेच्छा से विवाह समारोह के लिए डेढ़ घंटे के लिए मंच खाली कर दिया.

मुस्लिम परिवार ने की मदद

कावड़े और गलांडे परिवारों का विवाह समारोह समाप्त होने के बाद, काजी परिवार का रिसेप्शन समारोह उस हॉल में फिर से शुरू हुआ. इस तरह, अलग-अलग धर्मों, हिंदू और मुस्लिम, के जोड़े का विवाह समारोह एक ही हॉल में एक ही मंच पर आयोजित किया गया. कावड़े और गलांडे परिवारों ने काजी परिवार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जो मुसीबत के समय भगवान की तरह उनकी सहायता के लिए आगे आए.

क्या बोले दुल्हन के पिता?

दुल्हन के पिता चेतन कवाडे ने कहा कि मेरी बेटी की शादी बारिश के कारण बाधित हो गई थी. ऐसे में काजी परिवार ने हमारी मदद की और शादी संपन्न हुई. दरअसल, जाति और धर्म से ज्यादा मानवता महत्वपूर्ण है और हमें कल यह देखने को मिला.

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