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प्रोफेसर अली खान को मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- महिला अधिकारियों के अपमान वाला बयान कहां है?

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अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है. प्रोफेसर की ओर से गिरफ्तारी के खिलाफ दाखिल याचिका पर कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस भी जारी किया. इसके अलावा बयान की जांच के लिए SIT टीम का गठन करने का निर्देश भी दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि हम याचिकाकर्ता को सीजेएम सोनीपत की संतुष्टि के लिए जमानत बांड प्रस्तुत करने की शर्त पर अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश देते हैं. दोनों एफआईआर के लिए जमानत बांड का सिर्फ एक सेट होगा. इसके अलावा हम यह भी निर्देश देते हैं कि इस मामले के विषय से संबंधित मुद्दों पर कोई लेख या ऑनलाइन पोस्ट नहीं लिखा जाना चाहिए और न ही कोई भाषण दिया जाना चाहिए.

3 सदस्यीय SIT टीम में हो एक महिला अफसर

साथ ही उन्हें भारत द्वारा हाल ही में सामना किए गए संकट पर कोई टिप्पणी करने से रोका जाता है, जो भारतीय धरती पर एक आतंकवादी हमला था या हमारे राष्ट्र द्वारा दी गई प्रतिक्रिया थी. इसके अलावा याचिकाकर्ता को पासपोर्ट जमा करना होगा.

हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो कथित आपत्तिजनक ऑनलाइन पोस्ट की विषय-वस्तु को देखते हुए, याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, हम संतुष्ट हैं कि जांच पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं बनता है.

कोर्ट ने कहा, “हम हरियाणा के डीजीपी को 3 आईपीएस अधिकारियों की एक एसआईटी टीम गठित करने का निर्देश देते हैं, जो हरियाणा या दिल्ली से संबंधित नहीं हों. एसआईटी टीम का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक करेंगे जबकि सदस्यों में से एक महिला अधिकारी होगी.” कोर्ट ने इसके लिए 24 घंटे का वक्त दिया है कि 24 घंटे के भीतर एसआईटी टीम का गठन होना चाहिए.

महिलाओं का अपमान करने वाला बयान कहां हैः SC

कपिल सिब्बल की दलीलों के बाद जस्टिस कांत ने कहा कि स्वतंत्र अभिव्यक्ति वाले समाज के लिए यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जानबूझकर शब्दों का चयन अपमान करने और दूसरे पक्ष को असहज करने के लिए किया जाता है. उनके पास इस्तेमाल करने के लिए शब्दकोश के शब्दों की कमी नहीं होनी चाहिए. वे ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे दूसरों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और तटस्थ भाषा का इस्तेमाल करें.

सिब्बल ने कहा, “लेकिन कोई आपराधिक इरादा या सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं की गई है. उन्हें बस चोट लगी थी. उनकी पत्नी 9 महीने की गर्भवती है, लेकिन वे जेल में हैं, अब महिला आयोग द्वारा दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है. आखिर उन्होंने महिलाओं के खिलाफ क्या कहा.”

सुनवाई के दौरान जस्टिस कांत ने कहा, “आपकी आपत्ति जायज है, लेकिन अब जबकि कोर्ट ने बिना किसी आपत्ति के इसे दर्ज कर लिया है तो हमें बताइए मिस्टर राजू, कि वह बयान कहां है जिसमें उन्होंने महिला अधिकारियों का अपमान किया है? महिला आयोग द्वारा दर्ज एफआईआर में यह-वह लिखा है. लेकिन वकील द्वारा तैयार की गई कोई बात, हमें दिखाइए कि उन्होंने महिला सैन्य अधिकारियों का अपमान कहां किया है. अगर ऐसा है तो यह गंभीर है.” इस पर एएसजी राजू ने कहा कि मुझे याचिका देखने दीजिए. उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी पर कुछ टिप्पणियां की हैं.

पोस्ट को लेकर SC में लंबा चली बहस

जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के समक्ष प्रोफेसर की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील पेश करना शुरू किया. सिब्बल ने कहा कि आप बयान देखें, जिसके आधार पर प्रोफेसर महमूदाबाद पर आपराधिक दोष लगाया गया है.

इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा, “यह कहां पोस्ट किया गया था?” सिब्बल ने जवाब में कहा कि इंस्टाग्राम और फिर फेसबुक. इसके बाद सिब्बल ने महमूदाबाद का बयान पढ़ना शुरू किया. सिब्बल ने कहा कि यह बहुत ही देशभक्तिपूर्ण बयान है. फिर जस्टिस कांत ने कहा कि चलिए आगे पढ़िए.

सिब्बल के बयान पढ़ने के बाद जस्टिस कांत ने पूछा कि वह किसको संबोधित कर रहे हैं? सिब्बल ने कहा कि मीडिया चला रहा था कराची पर कब्जा, लाहौर पर कब्जा. फिर जस्टिस कांत ने कहा कि उन्होंने युद्ध के कारण सेना के जवानों के परिवार पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया और फिर राजनीति में पड़ गए.

सिब्बल ने कहा, “फिर उन्होंने कहा, मैं खुश हूं. वे दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों को संबोधित कर रहे हैं.” जस्टिस कांत ने कहा कि हां, यह स्पष्ट है. वे टिप्पणीकारों को संबोधित कर रहे हैं. सिब्बल ने आगे की लाइन पढ़ी.सिब्बल ने अपनी दलील देते हुए कहा कि वह जय हिंद के साथ अपना पोस्ट खत्म करते हैं. आप ये देखिए.

जस्टिस कांत ने कहा कि ये राय है. कुछ लोग राष्ट्र को ठेस नहीं पहुंचाते. कोई भी अपनी राय रख सकता है, लेकिन इसे देते समय ध्यान रखना चाहिए. इस पर सिब्बल ने कहा कि मैं सहमत हू्ं. सिब्बल ने महमूदाबाद का एक और बयान पढ़ा और आगे बेंच को बताया कि उन्होंने कहा कि सीजफायर हो चुका है, जबकि कुछ लोग अभी भी युद्ध की वकालत कर रहे हैं.

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