हिन्दू धर्म में अनेक नामों और स्वरूपों वाले भगवान गणेश को समर्पित एकादंता संकष्टी चतुर्थी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें सभी बाधाओं और संकटों को हरने वाला माना जाता है. ‘संकष्टी’ का अर्थ ही संकटों से मुक्ति दिलाना है. इस विशेष चतुर्थी को एकादंता संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. एकादंता भगवान गणेश के बत्तीस स्वरूपों में से एक हैं, जिनका एक दांत है.
कुछ क्षेत्रों में, महिलाएं इस व्रत को अपनी संतान की लंबी आयु और उनकी रक्षा के लिए रखती हैं. संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपत्ति भी इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करते हैं. इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
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