Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

युद्ध के माहौल के बीच डरे-सहमे लोग, खाली होने लगा ये गांव

24

फाजिल्का: भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध के माहौल के बीच इस समय की बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार माहौल तनावपूर्ण होता देख फाजिल्का के सीमावर्ती गांव पक्का चिश्ती के लोगों ने अब अपना घरेलू सामान एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए गांव पक्का चिश्ती के फौजा सिंह ने बताया कि सीमा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच युद्ध का माहौल है। इसे देखते हुए वह अपना घरेलू सामान फाजिल्का शहर से आगे पंचां वाली गांव में ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 1971 और 65 के युद्ध भी देखे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे बहुत नुकसान हुआ है और वे अपना सामान छोड़कर गांव लौट जाएंगे। यदि युद्ध छिड़ गया तो हमें कहीं भी भागना पड़ सकता है।

पिछले युद्धों के दौरान हमारे गांवों के कई लोगों को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया था और जब युद्ध समाप्त हुआ तो दोनों देशों ने आपसी सहमति से लोगों को वापस लौटा दिया था। जिसे देखते हुए वे हमेशा सतर्क रहते हैं, उन्होंने कहा कि वे अपने छोटे बच्चे को छोड़कर सीमा पर स्थित गांव में ही रहेंगे। प्रशासन ने उन्हें गांव खाली करने के लिए नहीं कहा है, लेकिन फिर भी अपने पिछले अनुभव के आधार पर वे अपना सामान दूसरी जगह भेज रहे हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.