Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

‘नहीं मिलेगा पत्नी के खाते का पैसा…’ बुजुर्ग को दौड़ाता रहा बैंक; कोर्ट के एक फैसले से खिल गया चेहरा

24

मध्य प्रदेश के भोपाल में एक शख्स अपनी पत्नी के बैंक अकाउंट से पैसा निकालने के लिए दो साल तक भटका. इसके बाद जाकर उन्हें कोर्ट से इंसाफ मिला. एक बुजुर्ग की पत्नी की मौत हो गई थी. इसके बाद जब वह अपनी पत्नी के खाते से उनके जमा किए गए पैसे निकालने पहुंचे तो उन्हें पैसे नहीं निकालने दिए गए. ऐसे में पैसे निकालने के लिए उन्होंने शिकायत दर्ज कराई, जहां अब पत्नी की मौत के दो साल बाद शख्स को इंसाफ मिला और उन्हें पत्नी के अकाउंट में जमा किए गए पैसे का उत्तराधिकारी बनाया गया.

दरअसल, 79 वर्षीय बुजुर्ग बाल कृष्ण विश्वकर्मा की 31 जनवरी 2023 को मौत हो गई थी. उनकी पत्नी ने बैंक में 3 लाख 42 हजार 628 रुपये जमा किए हुए थे. बाल कृष्ण की पत्नी का अकाउंट केनरा बैंक में था. उन्होंने पत्नी की मौत के बाद उनके जमा किए गए पैसों को निकालने के लिए बैंक से संपर्क किया. जब वह बैंक में पैसे निकालने गए तो बैंक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनकी पत्नी ने अपने बैंक अकाउंट के लिए किसी को भी नॉमिनेट नहीं किया था.

एफिडेविट को भी कैंसिल कर दिया

बैंक में बाल कृष्ण विश्वकर्मा को बताया गया कि अकाउंट के लिए किसी को नॉमिनेट नहीं किए जाने की वजह से वह जमा पैसों के उत्तराधिकार नहीं हैं. इसके बाद बाल कृष्ण ने बैंक में वैध वारिस यानी अपने बच्चों के संबंध में एफिडेविट (Affidavit) दिया, लेकिन बाल कृष्ण विश्वकर्मा का एफिडेविट वाला तरीका भी काम नहीं आया और बैंक वालों ने उनके एफिडेविट को भी कैंसिल कर दिया.

दो साल बाद कोर्ट से मिला इंसाफ

बच्चों के संबंध में पेश किया गया एफिडेविट बैंक ने इसलिए कैंसिल कर दिया गया क्योंकि उनके बच्चों के पहचान संबंधी डाक्यूमेंट्स नहीं थे. फिर उन्हें इस मामले में दो साल बाद भोपाल जिला न्यायालय से इंसाफ मिला. कोर्ट ने बाल कृष्ण को उनकी पत्नी के पैसे दिए जाने पर सहमति जताई. इसके बाद बैंक की ओर से बाल कृष्ण को उनके पत्नी के अकाउंट में जमा पैसों का उत्तराधिकारी बनाया और उन्हें पैसे मिल गए.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.