प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात मंगलवार को रात में हुई और अगले ही सुबह बुधवार को जातीय जनगणना को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई. अब इस बात की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ने लगी है कि क्या केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना कराने का फैसला संघ की रजामंदी के बाद किया है? संघ प्रमुख भागवत ने मंगलवार रात पीएम मोदी से उनके आवास पर भेंट की थी. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की बैठक में जातीय जनगणना को लेकर चर्चा हुई थी.
पिछले साल 2 सितंबर को केरल के पलक्कड़ में हुई संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक के दौरान आरएसएस ने जातीय जनगणना को लेकर समर्थन किया था. तब पलक्कड़ में बैठक के बाद अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख संघ सुनील आंबेकर ने टीवी9 भारतवर्ष संवाददाता के जातीय जनगणना के सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि जातीय जनगणना राष्ट्रीय एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है.
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