Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

यज्ञ करने से होगी बरसात? उज्जैन मंदिर पहुंचे साइंटिस्ट… रिसर्च से मिलेगा जवाब

16

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 24 अप्रैल को महाकालेश्वर मंदिर में साइंटिस्टों की एक टीम पहुंची, जहां देशभर में अच्छी बारिश के लिए एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. ये यज्ञ 24 अप्रैल से 29 अप्रैल तक किया जाएगा. इस यज्ञ का बारिश पर कितना प्रभाव पड़ेगा. इसका पता लगाने के लिए साइंस्टिस्ट की टीम रिसर्च करेगी, जो मंदिर पहुंची और स्टडी की.

मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और वैज्ञानिक परिषद (Madhya Pradesh Council of Sci-ence and Technology and Scien-tific Council), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर (Indian Institute of Technology Indore) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology) IITM ने एक रिसर्च प्रोजेक्ट की शुरुआत की है.

रिसर्च प्रोजेक्ट की शुरुआत

ये रिसर्च प्रोजेक्ट ये पता लगाने के लिए शुरू किया गया है कि क्या सोम यज्ञ (एक हवन), जिसमें औषधीय पौधे सोमवल्ली (सरकोस्टेमा ब्रेविस्टिग्मा, एक तरह का ओलियंडर) का रस अग्नि में चढ़ाया जाता है. वह पर्यावरण को साफ कर सकता है और बादल संघनन (cloud condensation) को रोक सकता है, जिससे बारिश का पता चलता है.

25 पुजारियों ने हिस्सा लिया

24 से 29 अप्रैल तक होने वाले इस यज्ञ में कर्नाटक और महाराष्ट्र से करीब 25 पुजारियों ने हिस्सा लिया, जो ये यज्ञ करने के लिए पहुंचे. इस दौरान साइंटिस्ट की टीम ने कई पैरामीटर्स जैसे यज्ञ से निकलने वाली गैस, तापमान और आर्द्रता में बदलाव, एरोसोल बिहेवियर और बादल संघनन का अध्ययन किया. वैज्ञानिक आर्मी इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करके अनुष्ठान की लपटों से निकलने वाले कणों की जांच कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह के बदलाव का पता लगाया जा सके.

बारिश के पैटर्न पर प्रभाव

साइंटिस्ट के रिसर्च का मकसद यह ये पता लगाने की कोशिश करना है कि क्या इस तरह के यज्ञों से बारिश के पैटर्न पर कोई प्रभाव हो सकता है. पिछले साल भी ऐसा ही यज्ञ किया गया था. इस बार वेदमूर्ति अध्वर्यु प्रणव काले, शौनक काले, ब्रह्मा यशवंत तालेकर, उद्गाता मुकुंद जोशी और गणेश कुलकर्णी समेत 25 पुजारी अनुष्ठान कर रहे हैं. इसके बाद 8 मई से 13 मई तक देवघर और द्वारका में भी अनुष्ठान किया जाएगा.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.