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PM के करीबी और योगी से बेहतर तालमेल… बनारस में 4 कारणों से IAS कौशल शर्मा बने ‘स्पेशल’

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यूपी के वाराणसी प्रशासन के इतिहास में कौशलराज शर्मा पहले ऐसे आईएएस अधिकारी हैं जिन्हें वाराणसी के डीएम के बाद वाराणसी का मंडलायुक्त बनाया गया. ये पहला वाकया बना, जिससे ये बात सामने आई कि कौशलराज शर्मा पर वाराणसी और पूर्वांचल में चल रहे डेवलपमेंटल प्रोजेक्ट्स पर न सिर्फ पैनी निगाह रखनी है बल्कि पीएमओ को इन प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हर छोटी बड़ी जानकारी भी देनी है.

ये बनारस प्रशासन के इतिहास में पहला मौका था जब किसी डीएम को यहीं का कमिश्नर बनाया गया हो, लेकिन तब भी ये महज अंदेशा ही था कि कौशलराज शर्मा पीएमओ के बेहद करीबी हैं. लेकिन, इस बात पर मुहर तब लगी जब वाराणसी के मंडलायुक्त पद से कौशल राज शर्मा का ट्रांसफर प्रयागराज कर दिया गया और महज 24 घंटे के अंदर ही यूपी सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा.

यहां से ये बात साबित हो गई कि कौशल राज शर्मा पर वाराणसी और पूर्वांचल में चल रहे करीब 70 हज़ार करोड़ की परियोजनाओं को पूरा कराने और उनकी रिपोर्ट लखनऊ के साथ-साथ पीएमओ को भेजने की जिम्मेदारी है. कौशलराज शर्मा ने अपनी जिम्मेदारी बिना किसी विवाद के बखूबी निभाई. 2 नवंबर 2019 को कौशल राज शर्मा बनारस के डीएम बनाए गए और 10 अक्टूबर 2022 को वाराणसी के मंडलायुक्त के रूप में इनकी तैनाती हुई. अब कौशल राज शर्मा सीएम योगी के सचिव बनाए गए हैं और एक बार फिर से वो दिल्ली- लखनऊ और बनारस के बीच ब्रिज की भूमिका में होंगे. वह बनारस में 4 कारणों की वजह से जाने जाएंगे.

विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के निर्माण

कौशल राज शर्मा को बनारस में विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के निर्माण के लिए याद रखा जाएगा. यूं तो कॉरिडोर का शिलान्यास 8 मार्च 2019 को हुआ था, लेकिन कॉरिडोर के लिए भवनों और जगहों का अधिग्रहण उनका मुआवजा और कई छोटे बड़े मंदिरों का विस्थापन जो एक जटिल और बेहद कठिन प्रक्रिया मानी जा रही थी उसका बनारस के डीएम रहते सफलता पूर्वक निष्पादन किया कौशल राज शर्मा ने. काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर जिसको विश्वनाथ धाम भी कहते हैं ये लगभग 50,000 वर्ग मीटर के एक बड़े परिसर में बनाया गया है. इसका मुख्य दरवाज़ा गंगा की तरफ़ ललिता घाट से होकर है.

विश्वनाथ कॉरिडोर को 3 भागों में बांटा गया है. पहला, मंदिर का मुख्य भाग है जो लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है. इसमें 4 बड़े-बड़े गेट लगाए गए हैं. इसके चारों तरफ एक प्रदक्षिणा पथ बनाया गया है. उस प्रदक्षिणा पथ पर संगमरमर के 22 शिलालेख लगाए गए हैं जिनमें काशी की महिमा का वर्णन है. कॉरिडोर में 24 भवन भी बनाए जा रहे हैं. इन भवनों में मुख्य मंदिर परिसर, मंदिर चौक, मुमुक्षु भवन, तीन यात्री सुविधा केंद्र, चार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मल्टीपरपस हॉल, सिटी म्यूज़ियम, वाराणसी गैलरी, जलपान केंद्र गंगा व्यू कैफे आदि हैं.

रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर भी अहम योगदान

पीएम मोदी का ये ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसमें काशी दुनिया के उन तीन शहरों में शामिल होने जा रहा है जहां अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोपवे का संचालन होगा. इस प्रोजेक्ट को वाराणसी में लाने के लिए कौशल राज शर्मा की अहम भूमिका रही है. नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के अधिकारियों के मुताबिक, रोपवे के संचालन के लिए ऑस्ट्रेलिया की एक्सपर्ट कंपनी “रोप एक्सपर्ट्स” के इंजीनियर द्वारा रोप पुलिंग किया गया था. इसके बाद 30 जनवरी से ट्रायल रन का काम शुरू हुआ था, जो अप्रैल के अंत तक पूरा हो जाएगा. 4 गंडोला को 5 मीटर प्रति सेकेंड की गति से चला कर ट्रायल रन किया जा रहा है. ये रोप वे प्रोजेक्ट 645 करोड़ की लागत से 3.75 किमी लंबा होगा.

रोपवे का पहला स्टेशन कैंट रोपवे स्टेशन होगा. दूसरा विद्यापीठ स्टेशन और तीसरा स्टेशन रथ यात्रा होगा. इसके बीच रोपवे का ट्रायल रन चल रहा है. कैंट से रथयात्रा की दूरी 2.4 किलोमीटर है, जिसके बीच 18 टावर लगे हैं. रथयात्रा से गौदोलिया तक दूसरे सेक्शन के लिए भी रोपवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है.

पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट “नमो घाट”

कौशल राज शर्मा नमो घाट को जमीन पर उतारने वाले अधिकारी के तौर पर जाने जाएंगे. 11 एकड़ में नमो घाट बनारस का पहला व्यावसायिक घाट बना है, जहां आर्थिक-सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित होती हैं. पहला फेज बनकर तैयार हो गया है. निर्माण में मेक इन इंडिया का विशेष ध्यान दिया गया है. इस घाट पर वोकल फॉर लोकल भी दिखता है. यहां पर्यटक सुबह-ए-बनारस का नजारा तो देखते ही हैं, साथ ही काशी-तमिल संगमम जैसे सांस्कृतिक आयोजन भी यहां होते हैं. लोग वाटर एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा भी लेते हैं. सुबह मॉर्निंग वॉक, व्यायाम और योग भी करते हैं.

दिव्यांगजन और बुजुर्गों के लिए मां गंगा के चरणों तक रैंप बना है. ओपेन थियेटर है, लाइब्रेरी, बनारसी खान पान के लिए फूड कोर्ट हैं. लोग जेटी से बोट के जरिए काशी विश्वनाथ धाम तक जाते हैं. फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन है. यहां मल्टीपर्पज प्लेटफॉर्म है, जहां हेलीकॉप्टर उतरने के साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी होते रहते हैं.

व्यास जी के तहखाने में पूजा का मामला

कौशल राज शर्मा को सिर्फ विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतारने को लेकर ही नहीं जाना जाएगा बल्कि उनके कुछ ऐसे फैसलों को लेकर भी याद रखा जाएगा जिनको लेकर देश भर में विवाद हुआ, एक ऐसा ही फैसला था व्यास जी के तहखाने में पूजा पाठ कराने की जल्दबाजी का फैसला. वाराणसी का मंडलायुक्त यूं तो श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष होता है, लेकिन क्या वो खुद पूजा पर बैठ सकता है और वो भी तब जब ज्ञानवापी परिसर में व्यास जी के तहखाने में 31 साल के बाद पूजा पाठ की शुरुआत हो रही हो?

31 जनवरी 2024 को वाराणसी के जिला अदालत ने वाराणसी प्रशासन को व्यास जी के तहखाने में फिर से पूजा पाठ शुरू कराने का आदेश दिया. वाराणसी प्रशासन ने 31 जनवरी की आधी रात को अप्रत्याशित फैसला लेते हुए पूजा कराने का फैसला किया. मुस्लिम पक्ष ने इसे एकतरफा कार्रवाई मानते हुए इसके लिए वाराणसी के मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा को जिम्मेदार बताया. कौशल राज शर्मा की तूलना अयोध्या के डीएम रहे आईएएस केके नैय्यर से की गई. मुस्लिम पक्ष ये कहता रहा कि प्रशासन के इस कदम से उनको ऊपरी अदालत में जाने का समय नही मिला. हालांकि वो इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन तब तक पूजा हो चुकी थी और अब ये मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. हालांकि ये बात कभी साबित नहीं हो पाई कि तत्कालीन मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा उस आधी रात को व्यास जी के तहखाने में पूजा पर बैठे थे.

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