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वक्फ कानून: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों की अंतरिम आदेश न देने की मांग? ये 3 पॉइंट बने वजह

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वक्फ संशोधन कानून पर आज की सुनवाई पूरी हो चुकी है. करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वालों की सबसे बड़ी मांग थी कि इस पर बिना किसी देरी के रोक लगाई जाए. अदालत ने ऐसा कोई आदेश तो नहीं दिया. लेकिन वह एक अंतरिम आदेश जारी करने को लेकर लगभग तैयार हो गई थी.

तभी दिलचसप घटनाक्रम हुआ. कोर्ट के अंतरिम आदेश जारी करने की इच्छा पर केंद्र सरकार की तरफ से अदालत में पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कुछ आपत्ति जताई. ऐसे में, अदालत ने इस अंतरिम आदेश को कल की सुनवाई तक के लिए टाल दिया. सवाल है कि अदालत जिस आदेश की तरफ बढ़ रही थी, उस में कौन सी ऐसी बातें थीं, जिस पर सरकार को आपत्ति थी.

पहला – अदलात के अंतरिम आदेश में सबसे अहम ये था कि जब तक अदालत वक्फ संशोधन कानून 2025 पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देती, ऐसी कोई भी संपत्ति जिसे अदालत ने वक्फ घोषित कर रखा है, उनका वक्फ का दर्जा हटाया नहीं जा सकता. चाहें वो वक्फ बाई यूजर हो या फिर वक्फ बाई डीड.

दूसरा – नए संशोधन में प्रावधान है कि अगर किसी वक्फ की संपत्ति पर विवाद हो गया तो जब तक जिलाधिकारी उस पर अपना फैसला नहीं सुना देता, तब तक उसका वक्फ का दर्ज अमान्य घोषित रहेगा. अदालत अंतरिम आदेश जारी कर इस प्रावधान को भी मुल्तवी करना चाहती थी. अदालत का मत था कि जिलाधिकारी अपनी कार्यवाही जारी रख सकता है, मगर नए प्रावधान फिलहाल लागू नहीं होंगे.

तीसरा – अदालत ये आदेश भी जारी करने वाला था कि पदेन सदस्यों के अलावा वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ काउंसिल के सभी सदस्य मुस्लिम होने चाहिए. पर यहां भी सरकार को दिक्कत नजर आई. सरकार की आपत्ति के बाद अदालत ने कल की सुनवाई में इस अंतिरम आदेश पर विचार करने का फैसला किया.

कोर्ट ने आज की सुनवाई के दौरान न सिर्फ सरकार बल्कि कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वालों से भी काफी तीखे सवाल किए. अदालत ने सरकार से वक्फ काउंसिल और बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या, वक्फ बाई यूजर को समाप्त करने वाले प्रावधान पर स्थिति साफ करने को कहा. संभव है सरकार अगले दो हफ्ते में इन सब विषयों पर एक जवाब अदालत में दाखिल करे.

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