Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
तारापीठ के होटल में भीषण आग से हाहाकार: 7 श्रद्धालुओं व कर्मचारियों की मौत, 45 मिनट तक टॉयलेट में फं... लखीसराय: अशोकधाम हॉल्ट पर करंट की अफवाह से मची भगदड़, 8 श्रद्धालुओं ने तोड़ा दम; DM ने स्पष्ट की स्थ... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर किरेन रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार रामपुरहाट टीएमसी दफ्तर में फंदे से लटके मिले पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी: सुसाइड नोट में मानसिक ... बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क टाइपिंग टेस्ट में तकनीकी गड़बड़ी: वाशिम समेत कई केंद्रों पर हंगामा, छात्रों न... 'बिहार बन रहा पेपर लीक की राजधानी': तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला, 19 अगस्त को राजभवन मार्च... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, छिड़ा सियासी घमासान बरेली: सरकारी नौकरी का झांसा देकर रचाई शादी, विरोध पर बेल्ट से पीटा और छीने जेवर; पति समेत ससुराल वा... सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, बड़ी ... भिवंडी: दरगाह में इलाज के नाम पर महिला से अघोरी रस्में व प्रताड़ना; UP भागने की फिराक में था मौलवी, ...

महादेव बेटिंग ऐप मामले में आरोपी सुनील दम्मानी को जमानत, लेकिन माननी होगी ये शर्त

33

महादेव बेटिंग स्कैंडल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी सुनील दम्मानी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी है. महादेव सट्टेबाजी ऐप में पीएमएलए आरोपों के संबंध में सुनील दम्मानी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये फैसला दिया.

याचिकाकर्ता के लिए वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि मेरे मुवक्किल 14 महीने से जेल में हैं. 98 गवाह हैं. मुकदमा शुरू नहीं हुआ है. वह किसी विशेष अपराध में शामिल नहीं है. सुनील को 15 दिन में ED कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी. कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर रोक रहेगी.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि यह याचिका एक विचाराधीन आरोपी द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है जिसके द्वारा उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. अपीलकर्ता 23 अगस्त, 2023 से हिरासत में है. प्रथम दृष्टया अपीलकर्ता के खिलाफ मामला यह है कि हवाला ऑपरेटर होने के नाते उसने अपराध की आय को स्थानांतरित करने में मदद की.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा विचार है कि अपीलकर्ता को संबंधित अदालत द्वारा लगाए गए नियमों और शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जा सकता है. कुछ शर्तें हमारी ओर से भी लागू की जाएंगी. हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया गया है, यदि किसी अन्य मामले में आवश्यकता नहीं है तो अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाना आवश्यक है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.