Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Namo Bharat Train: अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 55 मिनट में, सराय काले खां से मोदीपुरम तक दौड़ने को तैयार... Anant Bhaskar Murder Case: आंध्र प्रदेश के पूर्व MLC अनंत भास्कर पर हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने... सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बंगाल में न्यायिक नियुक्तियों पर जारी खींचतान पर SC का बड़ा फैसला, अधिकारिय... बड़ी खबर: क्या बाबरी के नाम पर बन सकती है नई मस्जिद? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया झटका, सुनव... Greater Noida News: रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक घंटे तक बाथरूम में बंद रही मासूम छात्रा, परिजनों ने ... भगवान को लिखा 'जॉब लेटर': छात्र ने मांगी 20 लाख के पैकेज वाली नौकरी, बदले में भगवान को दिया ये अनोखा... चुगली की तो कटेगी जेब! अब इधर-उधर की बातें की तो देना होगा भारी जुर्माना, जानें इस अनोखे फैसले के पी... Bihar Assembly News: 'ब्राह्मण' शब्द पर बिहार विधानसभा में हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले- "मै... Rahul Gandhi Sultanpur Visit: सुल्तानपुर में फिर मोची रामचेत की दुकान पर रुके राहुल गांधी, बेटी के इ... AAP Attacks Opponents: महिलाओं को 2500 रुपये, प्रदूषण और युवा; आप ने 15 सवालों के जरिए सरकार को घेरा

बृजबिहारी प्रसाद की कभी बिहार में बोलती थी तूती, अब राजनीति में कहां खड़ा है परिवार?

88

बिहार के चर्चित मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्या केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. कोर्ट ने दो आरोपी मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. पूर्व सांसद सूरजभान समेत 6 आरोपी बरी कर दिए गए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बृजबिहारी प्रसाद कौन थे और सूरजभान-शुक्ला से उनकी सियासी रंजिश कैसे शुरू हुई थी?

कौन थे बृजबिहारी प्रसाद, राजनीति में कैसे आए?

मोतिहारी के आदापुर में एक गांव है- भेड़ियाही. यहीं पर 20 जुलाई 1949 को बृजबिहारी प्रसाद का जन्म हुआ था. गांव में शुरुआती पढ़ाई लिखाई करने के बाद बृजबिहारी आगे पढ़ने के लिए मुजफ्फरपुर के एमआईटी आ गए.

कहा जाता है कि यहीं पर उसे छात्र राजनीति की तलब लग गई. इससे ज्यादा बृजबिहारी प्रसाद की 1990 के पहले की कोई लिखित कहानी है. हालांकि, यह जरूर कहा जाता है कि राजनीति में आने से पहले बृजबिहारी ठेका पट्टा का काम करते थे.

1990 में लालू यादव की पहल पर उन्हें पूर्वी चंपारण की आदापुर सीट से जनता दल ने टिकट दिया. बृजबिहारी ने इस चुनाव में माले के मुक्ति नारायण राय को करीब 25 हजार वोटों से हराया.

चुनाव बाद जनता दल की सियासी तिकड़म की वजह से लालू यादव मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे. बृजबिहारी प्रसाद को भी लालू ने अपने कैबिनेट में शामिल कराया. ग्रामीण विकास विभाग में उपमंत्री बनाए गए.

आनंद की बगावत से बढ़ा बृजबिहारी का दबदबा

1993 में जनता दल में पहली बड़ी बगावत हुई. बगावत का बिगूल फूंका राजपूत नेता आनंद मोहन ने. 1993 के वैशाली चुनाव में आनंद मोहन ने लालू के उम्मीदवार के सामने अपनी पत्नी को उतार दिया. आनंद मोहन उस वक्त सवर्ण रक्षा का झंडा लिए मैदान में उतरे थे. लालू पिछड़ी जाति की राजनीति पर फोकस जमाए हुए थे.

भूमिहार बाहुल्य वैशाली में लालू के साथ खेल हो गया और आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद चुनाव जीत गईं. इस चुनाव के बाद मुजफ्फरपुर के मतगणना केंद्र से आनंद मोहन ने ऐलान कर दिया कि 1995 में लालू को सत्ता से बेदखल कर देंगे.

कहा जाता है कि लालू ने इसके बाद पिछड़ों की गोलबंदी शुरू की. तिरहुत और मिथिलांचल में आनंद मोहन को घेरने के लिए बृजबिहारी को आगे किया गया. इसके बाद बृजबिहारी प्रसाद और आनंद मोहन के बीच शुरू होती है सियासी अदावत.

1995 के चुनाव में प्रचार के दौरान केसरिया से आनंद मोहन के उम्मीदवार छोटन शुक्ला की हत्या हो जाती है. छोटन शुक्ला उस वक्त आनंद मोहन के दाहिने हाथ माने जाते थे. बृजबिहारी प्रसाद हत्या के आरोपी बनाए जाते हैं. यह आरोप उस वक्त बृजबिहारी के प्रमोशन का कारण भी बन जाता है.

1995 में लालू जब दूसरी बार मुख्यमंत्री बनते हैं, तो अपनी सरकार में बृजबिहारी का कद बढ़ा देते हैं. बृजबिहारी उपमंत्री से सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया जाता है. उन्हें विभाग मिलता है विज्ञान और प्रद्यौगिकी का.

हत्या के बाद भाई और पत्नी ने संभाली राजनीति

1998 के जून महीने में पटना के आईजीआईएमएस हॉस्पिटल में बृजबिहारी प्रसाद की हत्या कर दी जाती है. हत्या का आरोप छोटन शुक्ला के भाई मुन्ना शुक्ला, उस वक्त के दबंग नेता सूरजभान और माफिया राजन तिवारी पर लगता है. कहा जाता है कि तीनों की तिकड़ी ने यूपी के मोस्ट वाटेंड अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला के जरिए बृजबिहारी की हत्या करवाई.

बृजबिहारी की हत्या के बाद उनके भाई श्याम बिहारी प्रसाद और पत्नी रमा देवी उनकी विरासत को संभालने सियासी मैदान में उतरते हैं. श्याम बिहारी 2010 तक भाई की सीट आदापुर से विधायकी का चुनाव लड़ते रहे. वे कई बार विधायक भी बने.

वहीं उनकी पत्नी रमा देवी 2019 में शिवहर से लोकसभा की सांसद चुनी गई थीं. 2024 के चुनाव में राजनीतिक समीकरण की वजह से बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया. वर्तमान में रमा देवी राजनीति में अलग-थलग चल रही हैं. उनके पास कोई सियासी पद नहीं है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.