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जंग की जिद में बर्बाद होती जिंदगियां, कब थमेगा ये सिलसिला?

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‘बम घरों पर गिरें कि सरहद पर, रूह-ए-तामीर ज़ख़्म खाती है,खेत अपने जलें कि औरों के, ज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती है…साहिर लुधियानवी साहब का ये शेर पढ़ते हुए मेरे जेहन में जो तस्वीरें आ रही हैं वह रुला देने वाली हैं. बारूद फिजा में घुल चुका है. शहरों के शहर तबाह हो चुके हैं. जर्जर हो चुकी इमारतें इस उम्मीद में टिकी हैं कि शायद हालात बदलेंगे. मलबे के ढेर में लाखों परिवारों की खुशियां दफन हो चुकी हैं. बस बची है तो जिंदगी, मगर उसका भी कोई भरोसा नहीं. अचानक एक बम या रॉकेट आता है और कई जिंदगियां तबाह कर जाता है. शहरों में जहां अस्पताल, स्कूल, पार्क, पुस्तकालय होने चाहिए वहां बंदूकें, तोप गोली टैंकर हैं. सोचिए कितना दिल दहलाने वाला होगा वो पल जब एक धमाके से किसी के जिगर के टुकड़े की जान चली जाती है. जो बच्चा कुछ देर पहले मुसीबत के मंजर में भी खुशी ढूंढ रहा था वह दर्द से तड़पते हुए हाथों में ही दम तोड़ देता है. किसी की पत्नी मरती है तो किसी परिवार का पोषण करने वाला शख्स ही मारा जाता है.

चंद रोज की ये जंग कितनी ही जिंदगियों के लिए बरसों का सितम बन चुकी है. फिलिस्तीन की गाजा पट्टी हो या फिर लेबनान. हर तरफ बस तबाही है. इसकी बानगी हैं तस्वीरें और आंकड़े. गाजा में ही इस साल अप्रैल तक 14 हजार से ज्यादा बच्चे मारे जा चुके हैं. खुद यूएन ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है. हजारों बच्चे घायल हैं. जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें से सैकड़ों बच्चों के शव ही नहीं मिले, वे आज भी इमारतों के मलबे में दबे हैं. कुछ के चीथड़े उड़ गए तो कुछ शव तो मिले, मगर उन्हें लेने के लिए माता-पिता ही नहीं बचे.

लेबनान में बर्बादी की इंतेहा

लेबनान में ताजा हमले उदाहरण हैं कि कैसे बर्बादी की इंतेहा हो रही है. चंद रोज पहले की ही बात है जब सिलसिलेवार पेजर अटैक शुरू हुए थे. बेशक ये हमले हिजबुल्लाह को निशाना बनाने के लिए किए गए थे, मगर इन हमलों में कई मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. ये हमले बेहद भयावह थे. एक साथ एक ही समय पर हजारों पेजरों का फट जाना कितना घातक था मौत के आंकड़े इसकी बानगी भर हैं. दूसरे दिन वॉकी टॉकी और रेडियो अटैक हुए और अब इजराइल की एयर स्ट्राइक से तबाही मची है. मंगलवार को भी इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के तकरीबन 300 ठिकानों को निशाना बनाया. इनमें 274 लोगों की मौत हुई, जिनमें 21 से ज्यादा बच्चे शामिल थे. कई महिलाएं और बुजुर्ग भी थे. ऐसा लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है.

इस तबाही का दोषी कौन?

इजराइल पर हमला कर हमास ने जंग को न्योता दिया. इजराइल के लोग बंधक बनाए गए तो उसने हमास पर जवाबी प्रहार किया. नुकसान हमास का कम, गाजा पट्टी के लोगों का ज्यादा हुआ. लाखों लोगों को बेघर होना पड़ा. शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी. जंग के आगाज से अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं. परिवार के परिवार मिट चुके हैं. बचा है तो बस दर्द, मलबे के ढेर, धूल और तबाही का मंजर. अस्पताल स्कूल, पार्क सब खत्म हो चुके हैं. आसमान से गिराए गए बमों से हजारों लोग अपने बिस्तर पर ही मारे जा रहे हैं. जिंदगियां भूख से तड़प रही हैं, पानी तक नसीब नहीं हैं. आखिर इन हालात का दोषी कौन है? हमास-इजराइल या जंग?

क्या जंग है मसले का हल?

हमास- इजराइल के बीच की जंग हो या फिर हिजबुल्लाह और इजराइल की. इसका प्रभाव आम लोगों पर पड़ रहा है. उन लोगों पर जो जंग की कल्पना भी नहीं करना चाहते. एक तरफ से रॉकेटों की बरसात होती है तो दूसरी तरफ से एयरस्ट्राइक कर दी जाती है. कहीं से बम गिराए जाते हैं तो उसे रॉकेट से जवाब दिया जाता है. शुरुआत में जॉर्डन, कतर और यूएस ने मिलकर मध्यस्थता की कोशिश भी की, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. नतीजतन अब तक इस युद्ध में अकेले गाजा से ही 40 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और तकरीबन 92 हजार लोग घायल हैं. यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक गाजा की आबादी में से हर 10 लोगों में से लगभग 9 को विस्थापित होना पड़ा है.

महिलाएं और बच्चों पर सबसे ज्यादा जुल्म

  • हमास ने इजराइल पर हमला किया जिसमें 1200 लोग मारे गए, इनमें 65 से ज्यादा महिलाएं थीं.
  • इजराइल ने हमास पर जवाबी कार्रवाई की इनमें 10 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत हुई, 20 हजार से ज्यादा महिलाएं घायल हुईं.
  • यूएन की रिपोर्ट के अनुसार औसतन 37 महिलाओं की गाजा में हर रोज हत्या होती है,
  • गाजा में जंग के हालात से जूझ रहीं 1 लाख 55 हजार से ज्यादा महिलाएं या तो गर्भवती हैं या उनका प्रसव होने वाला है.
  • हमास-इजराइल के बीच जंग में अब तक तकरीबन 14000 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है. 30 हजार से ज्यादा बच्चे घायल हैं.

नेतन्याहू का क्या है कहना

लेबनान में मची तबाही पर इजराइल के पीएम नेतन्याहू का कहना है कि वह लेबनान के लोगों के खिलाफ युद्ध नहीं कर रहे. यह लड़ाई हिजबुल्लाह के खिलाफ है, जो लेबनान के लोगों को ह्यूमन शील्ड के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. नेतन्याहू ने इस वीडियो संदेश में दावा किया है कि हिजबुल्लाह ने आम लोगों के कमरों में और गैराज में जो रॉकेट और बम रखे हैं उनसे सीधे इजराइल पर हमला बोला जा रहा है. इजराइल इसलिए कार्रवाई कर रहा है. तो वहीं हिजबुल्लाह का तर्क ये है कि इजराइल ने जिस तरह से लेबनान में हमले किए वह नरसंहार हैं. इनका जवाब दिया जाएगा.

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