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उमरिया में बांधवगढ़ के बफर में 50 से ज्यादा बाघ, प्रदेश के दूसरे रिजर्व में भी ऐसा ही खतरा

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उमरिया । एमपी के उमरिया में बांधवगढ़ के बफर जोन में सक्रिय बाघों से ग्रामीणों पर खतरा बना हुआ है। ऐसा ही खतरा प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में उत्पन्न होता जा रहा है। इसकी मूल वजह है उन बाघ गलियारों का क्षतिग्रस्त होना जो एक जंगल को दूसरे जंगल से जोड़ते हैं। वन्य प्राणी और मानव द्वंद को रोकने के लिए बांधव वीर दल का गठन किया गया है।

वर्षाकाल के दौरान यह खतरा और भी बढ़ सकता है

बांधवगढ़ के जंगल में पचास से ज्यादा बाघ बफर में सक्रिय हैं। प्रदेश दूसरे टाइगर रिजर्व में भी हाल कुछ ऐसे ही हैं। इससे वन्य प्राणी और मानव द्वंद का खतरा बना हुआ है। वर्षाकाल के दौरान यह खतरा और भी बढ़ सकता है। हालांकि सभी टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणी और मानव द्वंद को रोकने के लिए अपने स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं।

बफर में सक्रिय बाघ

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बफर के 820.035 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 50 बाघ सक्रिय हैं।
  • कान्हा टाइगर रिजर्व में बफर के 1134.319 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 50 बाघ सक्रिय हैं।
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बफर के 794.043 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 20 बाघ सक्रिय है।
  • पेंच टाइगर रिजर्व में बफर के 1179.632 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 30 सक्रिय है।
  • पन्ना टाइगर रिजर्व में बफर के 1021.972 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 25 बाघ सक्रिय है।
  • संजय टाइगर रिजर्व में बफर के 861.931 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सात बाघ सक्रिय है।

टाइगर रिजर्व में बाघ

पिछली गणना में मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या 785 हो गई है और टाइगर रिजर्व के बाघों की संख्या का आंकड़ा भी इसके साथ बदल गया है। बांधवगढ़ में 165, कान्हा टाइगर रिजर्व में 129, पन्ना टाइगर रिजर्व में 64, पेंच टाइगर रिजर्व में 123, सतपड़ा टाइगर रिजर्व में 62 और संजय धुबरी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 20 हो गई है। यहां खास बात यह है कि स्टीमेशन के दौरान दस प्रतिशत का मार्जिन भी रखा जाता है। यानी यह संख्या दस प्रतिशत कम और ज्यादा भी हो सकती है। सामान्य वन मंडल में बाघों की संख्या भी अलग है।

बफर में ही बना टैरेटरी

बफर में सक्रिय बाघों ने यहां अपनी टैरेटरी बना ली है और उनका अपना मार्ग भी तय हो गया है जिस पर वेआना-जाना करते रहते हैं। बाघों का यह मार्ग कहीं-कहीं पर ग्रामीणों के मार्ग को भी क्रास करता है। इसलिए इन क्षेत्रों पर नजर रखना जरूरी हो गयाहै। मानसून प्रारंभ होने के साथ ही सभी प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में गश्ती के लिए पाइंट बनाकर पैदल पेट्रोलिंग दल गठित कर दिए गए हैं।

रोज हो रही गश्त

प्रतिदिन पांच से छह वर्ग किमी. जंगल में मानसून गश्ती की जा रही है। गश्ती में इंसान और हाथी को शामिल किया गया है। बांधवगढ़ के सभी 9 रेंज के 1536.938 वर्गकिमी. पर 165 से अधिक बाघ व 60 जंगली हाथियों के बीच तीन महीने तक यह सुरक्षा तंत्र विशेष अलर्ट पर रहेगा।

वन्य प्राणी और मानव द्वंद को रोकने के लिए बांधव वीर दल का गठन

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणी और मानव द्वंद को रोकने के लिए बांधव वीर दल का गठन भी किया गया है। इसमें बीस गांव के सौ युवाओं को शामिल किया गया है। इन सभी युवाओं को युनीफार्म दिए गए हैं और वाट्सएप ग्रुप से इन्हें जोड़ दिया गया है। यह दल वन अधिकारियों के निर्देश पर काम कर रहा है।

झाड़िया उगने पर कई बार बाघ कई दिनों तक नहीं दिखते

बरसात में घास मैदान व झाड़िया उगने पर कई बार बाघ कई दिनों तक नहीं दिखते। इससे मनुष्यों पर हमले की घटनाएं बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि टाईगर रिजर्व में मानसूनएलर्ट कर यह विशेष गश्त की जा रही है।

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