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अरविंद केजरीवाल को भी संजय सिंह की तरह मेरिट से बाहर जमानत, PMLA केस चलता रहेगा

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. आम आदमी पार्टी में जोश हाई है. लेकिन पूरे मामले में कुछ बातें बारीकी से ध्यान देने की जरूरत हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को भी उसी तरह जमानत दी है, जैसे पार्टी के सांसद संजय सिंह को जमानत मिली है. यानि अरविंद केजरीवाल को पीएमएलए केस के आधार पर नहीं बल्कि सिर्फ जमानत की जरूरत के आधार पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है. कहने का आशय ये कि कोर्ट ने पीएमएलए केस को बरकरार रखा है. लिहाजा फिलहाल वे आरोप मुक्त नहीं हुए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को केस की मेरिट से बाहर जाकर नियमित जमानत दी थी. केजरीवाल के मामले में भी ऐसा ही किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि हम इस मामले को पीएमएलए केस के आधार पर नहीं सुन रहे हैं, बल्कि एक सीएम जेल में बंद हैं और देश में चुनाव है, इसको ध्यान में रखकर उनको चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी जा रही है.

कोर्ट ने पहले ही दिया था संकेत

सुप्रीम कोर्ट के जज संजीव खन्ना ने तीन दिन पहले ही अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत की सुनवाई के समय इसका इशारा किया था. जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था कि देश में लोकसभा चुनाव चल रहा है, यह एक्ट्रा ऑर्डिनेरी कंडीशन है. केजरीवाल चुने हुए मुख्यमंत्री है. कोर्ट ने ये भी कहा था कि वह किसी अन्य मामले में शामिल नहीं हैं, वह आदतन अपराधी नहीं हैं. जज ने कहा कि केजरीवाल के पार्टी का चुनाव प्रचार करने से किसी को कोई नुकसान नहीं है.

एसजी की दलील काम न आई

हालांकि सॉलिसीटर जनलर ने जमानत का विरोध किया. एसजी ने कहा था कि एक किसान को अपने खेत की फसल की कटाई करने के लिए जमानत नहीं दी जाती तो केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए क्यों जमानत दी जाए? उन्होंने दलील दी थी कि एक मुख्यमंत्री को आम आदमी से अलग कैसे माना जा सकता है? जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव 4 साल के बाद एक बार और कटाई हर 4 महीने में होती है, हम आपकी दलील की बिल्कुल भी सराहना नहीं करते हैं.

ईडी ने भी किया था विरोध

उससे पहले ईडी ने भी सुप्रीम कोर्ट में यह कहा था कि चुनाव प्रचार करना मौलिक अधिकार नहीं है. अरविंद केजरीवाल अगर जमानत पर बाहर होंगे तो केस प्रभावित हो सकता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया. हालांकि कोर्ट ने शर्तें रखी जिसमें ये कहा गया कि उन्हें 2 जून को फिर से सरेंडर कर देना होगा.

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