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नेशनल एग्रीकल्चर साइंस ने मिलेट्स के शोध के लिए दिए 98 लाख

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ग्वालियर। प्रदेश में पहली बार मिलेट्स की हाइब्रिड बीज तैयार किया जा रहा है। इसके लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। यह शोध ज्वार बाजरा पर हो रहा है। जिसका हाइब्रिड बीज तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए वैज्ञानिक दुनियाभर से मिलेट्स की वैरायटी को एकत्रित करने में लग चुके हैं। इसके लिए सबसे पहले हैदराबाद जीन बैंक के लिए पत्र लिखा गया है। जहां पर देश में सर्वाधिक मिलेट्स की वैरायटी मौजूद है।ज्वार और बाजरा की वैरायटी मिलने के बाद उससे हाइब्रिड बीज तैयार किया जाएगा।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय को नेशनल एग्रीकल्चर साइंस से 98 लाख रुपये की सहायता मिली है। जिसकी मदद से विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक शोध कार्य करेंगे। इसके लिए सबसे जरूरी है कि दुनियाभर में पाए जाने वाले मिलेट्स काे एकत्र करना। इसके लिए वैज्ञानिक देश और विदेश में संपर्क कर वहां से ज्वार-बाजरा के उपलब्ध बीज मंगवा रहे है इसके लिए वह पत्र के माध्यम से संवाद स्थापित कर रहे हैं।

हैदराबाद जीन बैंक में जर्म प्लाज और पुरानी वैरायटियां उपलब्ध हैं। जिनमें से 150 जर्मप्लाज्म और पुरानी वैरायटी मांगी गई है। जिनकी उपलब्धता होने पर उसे मैदानी तौर पर स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद यह देखा जाएगा कि इन वैरायटियों में कौन कौन से तत्व मौजूद हैं जो पोषक तत्वों को बढ़ाने घटाने में मदद करते है। इसी तर हसे पैदावार बढ़ाने के लिए कौन सा तत्व जिम्मेदार है। इन सभी तत्वों को बीज से अलग किया जाएगा और इन तत्वों से मिलाकर ऐसी वैरायटी तैयार की जाएगी जिसकी पैदावार अच्छी होगी और उसमें पोषक तत्व आयरन,कैल्शियम, विटामिन, फासफोरस, कार्बोहाइड्रेट ,जिंक आदि पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाया जा सके।कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि ज्वार और बाजरा की फसल खरीफ के मौसम में पैदा होने वाली फसल है। चंबल की बीहड़ में इसकी पैदावार अधिक होती है। वहां पर पैदावार बढ़े इसके लिए इस बात पर शोध किया जाना है कि इन वैरायटी में बढ़े हुए तापमान में पैदावार बढ़ाने के लिए कौनसा जीन जिम्मेदार है और कौन सा जीन बारिश ना होने पर सूखे में भी पैदावार कम ना होने दे इसका पता लगाया जाएगा। इन जीन की मदद से वैरायटी तैयार होगी जिसके लिए शोध चल रहा है।

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