Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

Masik Durgashtami 2023: मासिक दुर्गाष्टमी पर करें इस स्तोत्र का पाठ, मां दुर्गा का मिलेगा आशीर्वाद

67

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।

येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।

न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥॥

कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।

अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥॥

गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।

मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।

पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥॥

॥अथ मन्त्रः॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं स:

ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।”

॥इति मन्त्रः॥

नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।

नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥॥

नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि॥॥

जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे।

ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥॥

क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।

चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥॥

विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥॥

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।

भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं

धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥॥

सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥

इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।

अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥

यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।

न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥

इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।

॥ॐ तत्सत्॥

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.