Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jaipur Murder Case: जयपुर में पत्नी और 3 बेटियों का हत्यारा राहुल झा गिरफ्तार, खाटूश्यामजी और रींगस ... US-China Tension: चीन ने ईरान को दी थी अमेरिकी एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें? जॉर्डन हमले में 3 US सैन... Ganga Aarti in London: लंदन में टेम्स नदी के किनारे पहली बार हुई भव्य गंगा आरती, दीपों से जगमगाया कि... BSF Rescue Operation: सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने बचाई 10 बांग्लादेशी नागरिकों की जान, 30 दिन के नव... Belagavi Murder News: कर्नाटक में 2 महीने से लापता महिला का गन्ने के खेत में मिला कंकाल, प्रेमी ने ब... Delhi Metro Arpan Kendra: पुराने कपड़ों से मिलेगा छुटकारा, दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुले अर्प... UCC in India: उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब 21 राज्यों की बारी, अमित शाह ने सेवा संकल्प अभियान के दौ... Chhath Puja Special Trains: दुर्गापूजा, दिवाली और छठ पर चलेंगी 18 स्पेशल ट्रेनें; दिल्ली-भागलपुर के ... Raebareli Murder Case: रायबरेली में प्रधान के बेटे की पीट-पीटकर हत्या, प्रेमिका ने फोन कर बुलाया; पत... UP PCS Transfer News: काशी विश्वनाथ मंदिर CEO विश्व भूषण मिश्र का ट्रांसफर, बने UPSSSC के नए उपसचिव;...

खड़े होकर अर्घ्य देने के पीछे ये कारण, पढ़ें क्या कहते हैं शास्त्र

37

इंदौर। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ करने के लिए नियम होते हैं। इन नियमों के हिसाब से ही देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। ऐसा ही एक नियम है कि सुबह स्नान के बाद सबसे पहले अर्घ्य देना होता है। यह अर्घ्य सूर्य देवता को, तुलसी जी को या फिर किसी भी देवता को दिया जा सकता है।

हिंदू धर्म में अर्घ्य देने के भी कई नियम हैं। हम हमेशा अर्घ्य खड़े होकर ही देते हैं, क्यों कि बैठकर अर्घ्य देने की मनाही है। ऐसे में क्या हमें पता है कि इसके पीछे के कारण क्या हैं। ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने विस्तार से बताया कि अर्घ्य देते समय खड़े रहने के पीछे के कारण क्या हैं।

खड़े होकर अर्घ्य देना का कारण

  • शास्त्रों में कहा गया है कि हमें पूजा करते समय बैठ जाना चाहिए। वहीं अर्घ्य खड़े होकर ही देना चाहिए, क्यों कि ऐसा करने से हमारे सातों चक्र जागृत हो जाते हैं। यह चक्र हमें दिव्यता की ओर ले जाते हैं।
  • दिव्यता की ओर जाने से नकारात्मकता शरीर से दूर होती है। हम सकारात्मकता की ओर बढ़ जाते हैं। इसके पीछे वैसे एक ओर कारण है कि बैठकर अगर हम अर्घ्य देंगे तो धरती पर जल के गिरने के बाद वह हमारे पैरों को छुएगा। यह अर्घ्य की पवित्रता को खत्म कर देगा।
  • शास्त्रों में कहा गया है कि हम जब भी अर्घ्य दें तो हमारा हाथ हमारे सिर पर ही होना चाहिए। ऐसे में हमारी मानसिक परेशानियां दूर हो सकती हैं। हमारा मानसिक तनाव कम हो जाएगा।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.