Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Sandipani School Bus Crisis: ग्वालियर-चंबल में सांदीपनि स्कूलों की बस सेवा ठप! 2.5 महीने बीते, 512 र... Ujjain Yuva Dharm Sansad: उज्जैन में युवा धर्म संसद का आगाज! RSS प्रमुख मोहन भागवत करेंगे उद्घाटन, म... Bihar Crime News: कैमूर में जमीन के पैसों के विवाद में जिंदा जलाए गए फौजी की मौत, गुस्साए ग्रामीणों ... Gaya Pitru Paksha Mela 2026: गया में ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज पर विवाद, पंडा समाज ने जताई कड़... Nashik Illegal Tree Felling: नासिक में विज्ञापन बोर्ड के लिए काटे गए 50 से ज्यादा पेड़, विज्ञापन कंप... Ashirwad Ka Diya Campaign: पीएम मोदी के जन्मदिन पर वाराणसी से लेकर कोलकाता तक जलाए गए दीये, सीएम योग... Kurnool Ganesh Visarjan News: गणपति बप्पा को वापस मांगते हुए रोता दिखा बच्चा, वीडियो सोशल मीडिया पर ... Syrian Politics Update: बशर अल-असद के जाने के बाद नई संसद का ऐतिहासिक कदम; काउंटर-टेररिज्म कोर्ट को ... Japan Bear Crisis: जापान में क्यों बढ़ रहा है भालुओं का खतरा? सरकार ने उठाया बड़ा प्रशासनिक कदम US Russia Sanctions Bill: अमेरिका के नए प्रतिबंध बिल पर भड़का रूस; क्रेमलिन बोला- यूक्रेन शांति वार्...

मोरबी पुल हादसा: ‘पीड़ितों के परिजनों को आजीवन पेंशन या नौकरी दें’, हाईकोर्ट का ओरेवा समूह को आदेश

40

गुजरात उच्च न्यायालय ने मोरबी पुल का संचालन व रखरखाव की जिम्मेदार कंपनी ओरेवा ग्रुप को इस ‘सस्पेंशन ब्रिज’ के टूटने की घटना में अपने बेटों को खो चुके बुजुर्गों को आजीवन पेंशन, और विधवाओं को नौकरी या वजीफा देने को कहा है। अदालत ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को एकमुश्त मुआवजे से उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिलेगी। मुख्य न्यायाधीश सुनील अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध मेयी की पीठ 30 अक्टूबर 2022 को हुए इस हादसे के संबंध में दायर स्वत: संज्ञान वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

‘आजीवन पेंशन या नौकरी दें’
हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी। सरकार के मुताबिक, घटना में 10 महिलाएं विधवा हो गईं और सात बच्चे अनाथ हो गए। मुख्य न्यायाधीश ने कंपनी से कहा, ‘‘विधवाओं को नौकरी दी जाए और वे नौकरी नहीं चाहती हैं तो उन्हें वजीफा दें। आपको आजीवन उनकी मदद करनी होगी। वे काम करने की स्थिति में नहीं हो सकते हैं। ऐसी भी महिलाएं हैं जिन्होंने कभी काम नहीं किया होगा, अपने घरों से कभी बाहर नहीं निकली होंगी। आप उनसे अपने घरों से बाहर निकलने और कहीं और जाकर काम करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।”

कंपनी ने किया दावा
कंपनी ने दावा किया है कि वह घटना में अनाथ हुए बच्चों, और विधवाओं का ख़याल रख रही है। उच्च न्यायालय ने यह जानना चाहा कि यह बुजुर्गों के लिए क्या कर रही है जिन्होंने अपने बेटों को खो दिया, जिनपर वे आश्रित थे। अदालत ने कहा, ‘‘बुजुर्ग पुरुष अपने बेटों की आय पर आश्रित थे…उन्हें आजीवन पेंशन दीजिए।” उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘एकमुश्त मुआवजा से उन्हें मदद नहीं मिलने जा रही है। कृपया इसे ध्यान रखें। कंपनी को क्रमिक रूप से खर्च करना होगा।”

मोरबी कलेक्टर सौंपे रिपोर्ट 
अदालत ने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों को मुआवजे के वितरण के लिए विश्वास कायम किया जाए क्योंकि वर्षों तक प्रक्रिया की निगरानी करना अदालत के लिए संभव नहीं हो सकता। पीठ ने सरकार से इस बारे में कुछ सुझाव देने को भी कहा कि पीड़ितों के परिजनों की क्या जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। अदालत ने मोरबी कलेक्टर को कंपनी के साथ समन्वय करने और मौजूदा स्थिति तथा पीड़ितों के परिजनों की वित्तीय हालत एवं उन्हें जरूरी सहयोग के बारे में एक रिपोर्ट सौंपने को कहा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.