Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

MPPSC Exam: राज्य सेवा परीक्षा में पूछे प्रश्नों के दिए गए उत्तर सही थे या गलत, सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा

39

इंदौर। राज्य सेवा भर्ती प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए दो प्रश्नों के जो विकल्प प्रश्न पत्र में दिए गए थे वे सही थे या गलत, इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट ही करेगी। यह कहते हुए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रश्नों के विकल्प को चुनौती देते हुए प्रस्तुत तीन दर्जन से ज्यादा याचिकाएं एक साथ निराकृत कर दी। पीएससी ने कोर्ट में आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका का जो भी परिणाम होगा वह सभी अभ्यर्थियों पर लागू किया जाएगा।

गौरतलब है कि राज्य सेवा भर्ती प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नों के विकल्प को लेकर विवाद है। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल ने बताया कि परीक्षा में पूछा गया था कि भारत छोड़ो आंदोलन कब शुरु हुआ था और मप्र चुनाव आयोग का गठन कब हुआ था। इन दोनों प्रश्नों के चार-चार विकल्प दिए गए थे। बाद में पीएससी ने इन चारों विकल्पों को गलत बताते हुए प्रश्न विलोपित कर दिए।

मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर हुई थी

इस मामले को लेकर अलग-अलग याचिकाएं हाई कोर्ट की विभिन्न खंडपीठों के समक्ष प्रस्तुत हुई। इसमें कहा था कि दोनों प्रश्नों के दिए गए चारों विकल्पों में से एक उत्तर सही है। इसलिए प्रश्नों को विलोपित नहीं किया जा सकता। जबलपुर में एकल पीठ ने एक याचिका का निराकरण करते हुए अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। इस फैसले को शासन ने युगलपीठ के समक्ष चुनौती दी, जहां से शासन को राहत मिल गई। इस पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया जहां वर्तमान में वह लंबित है।

इधर इंदौर खंडपीठ में भी तीन दर्जन से ज्यादा याचिकाएं इस संबंध में प्रस्तुत हुई थी। पीएससी का इन याचिकाओं मेंं कहना था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है इसलिए याचिकाएं निरस्त की जाएं। हाई कोर्ट ने याचिका निरस्त करने से इंकार करते हुए निराकृत की है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाले फैसले का फायदा सभी याचिकाकर्ताओं को मिलेगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.