Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

इस देश में बुजुर्गों की देखभाल करना हुआ महंगा, घर में जगह नहीं, टूट रहे परिवार

36

 अमेरिका में बुजुर्गों की देखभाल करना महंगा पड़ रहा है। ओल्ड एज होम का किराया ज्यादा हो गया है। इसलिए बुजुर्ग घर लौट रहे हैं, लेकिन पूरे परिवार के लिए घर छोटे पड़ रहे हैं। इसलिए परिवार तक टूटने लगे हैं। बुजुर्गों की देखभाल के लिए दोस्त और रिश्तेदार सामूहिक व्यवस्था कर रहे हैं, जहां उनके परिवार के बुजुर्ग रह सकें।

बढ़ती महंगाई के बीच सरकारी मदद भी बहुत कम हो गई है। अगर वे गरीबी रेखा के दायरे में नहीं आते हैं, तो सरकार से कोई मदद नहीं मिलती। दूसरी ओर, बुजुर्गों की देखभाल के लिए नियुक्त लोगों की सैलरी कम है, इससे वे अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए तैयार नहीं होते। ऐसे में बुजुर्ग अपने परिवार पर निर्भर हैं, लेकिन वे उनकी देखभाल नहीं कर पा रहे। 

बुजुर्गों की देखभाल का खर्च करीब 2500 रु. प्रति घंटे
ओल्ड एज होम में बुजुर्गों की देखभाल की लागत करीब 2500 रु. प्रति घंटे है। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2022 में लगभग 37 लाख लोगों के पास देखभाल में सहायक के रूप में नौकरियां थीं। इनमें से आधे प्रति वर्ष करीब 25 लाख रुपए या प्रति घंटे 1200 रुपए कम कमा रहे थे। अगले एक दशक में ऐसे लोगों की संख्या में 20% की वृद्धि होने की उम्मीद है। लेकिन काम की परिस्थितियां
कठिन हैं। वेतन आमतौर पर कम है और काम के घंटे तय नहीं हैं।

80 लाख अमेरिकी अल्जाइमर पीड़ित
द न्यूयॉर्क टाइम्स और केएफएफ हेल्थ न्यूज के सर्वेक्षण के अनुसार, 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 80 लाख अमेरिकी अल्जाइमर पीड़ित हैं। ऐसे 10 लाख को ही नर्सिंग होम सुविधा मिली। 30 लाख बेसहारा हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.