Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Muslim Personal Law: शरिया कानून के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नो... Bihar Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana: अब किश्तों में मिलेंगे 2 लाख रुपये, जानें क्या हैं नई शर्ते... Gurugram News: गुरुग्राम जा रही बैंककर्मी महिला की संदिग्ध मौत, 5 महीने पहले हुई थी शादी; पति ने पुल... Bajrang Punia News: बजरंग पूनिया ने हरियाणा सरकार को घेरा, बोले- घोषणा के बाद भी नहीं बना स्टेडियम Sohna-Tawru Rally: विकसित सोहना-तावडू महारैली में धर्मेंद्र तंवर ने किया मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत Haryana Crime: महिला बैंककर्मी की हत्या का खुलासा, पति ही निकला कातिल, शक के चलते दी दर्दनाक मौत Faridabad News: फरीदाबाद में DTP का भारी एक्शन, अवैध बैंक्विट हॉल और गेम जोन पर चला 'पीला पंजा' Faridabad News: फरीदाबाद की केमिकल फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट, 48 से ज्यादा लोग झुलसे लुधियाना में एसिड Attack, महिला पर युवक ने फैंका तेजाब, चीखों से गूंजा इलाका! Punjab Drug Menace: सरेआम चिट्टे का खेल! इंजेक्शन लगाते युवकों का वीडियो वायरल, दावों की खुली पोल

दीपू की जबरदस्त मांग, जिसकी कांव-कांव से आ जाते हैं कौवे

20

बरेली। कचरा बीनने वाले 9 वर्षीय दीपू की पितृपक्ष में काफी मांग है। दीपू कौओं की भाषा बोल सकता है। वह कांव-कांव करता हैं और कौओं को झुंड़ जमा हो जाता है। इस पर भले ही आप यकीन न करें, लेकिन आस्था से जुड़े पितृपक्ष कर्म को मानने वालों का यही विश्वास है।

आलम यह है कि दीपू को लोग यमराज का संदेशवाहक माना जाने लगा है। दीपू हू-ब-हू कौओं की आवाज निकला सकता है। आस-पास के लोग उसे ‘क्रो ब्वॉय’ के नाम से भी पुकारते हैं।

पितृपक्ष में कौओं की महत्ता

पितृपक्ष, हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण कर्म है। इस कर्म में कौओं का बहुत महत्व है। माना जाता है यदि कौए आकर पितरों को दिए गए भोजन को ग्रहण कर लें तो भोजन उन तक पहुंच जाता है।

पढ़ें:घर के बाहर ‘नेम प्लेट’ और अंदर ‘गंगा जल’ इसीलिए है जरूरी

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दीपू, पितृ पक्ष में गांव का एक व्यस्त लड़का है। कई लोग उसे मैदान में कौओं को आमंत्रित करने के लिए बुलाते हैं। दीपू यह काम निःशुल्क करता है। वह कौओं को अपनी आवाज से रामगंगा नदी के किनारे बुलाता है।

कौओं से ऐसे हुई दोस्ती

कौओं से दीपू की दोस्ती की शुरुआत लगभग तीन साल पहले हुई थी। जब उसके पिता का टीबी की बीमारी के कारण 2015 में स्वर्गवास हो गया था। अब तीन लोगों के परिवार में वह एकमात्र लड़का है। इसलिए उसने कम उम्र से ही कचरे से रिसाईकिल वस्तुएं उठाने का शुरू कर दिया था।

पढ़ें:जानिए 12 प्रकार के होते हैं श्राद्ध

दीपू कहता है, ‘एक दिन जब में कचरे के ढेर से उपयोगी वस्तुएं बटौर रहा था, तब मैंने देखा बहुत सारे कौए एक झुंड बनाकर वहां बैठे हैं। मैंने इस बात को गंभीरता से देखा और उनकी आवाजों को सुना, और ऐसा में उसी जगह पर रोज करने लगा। मैं उनकी आवाज निकालता तो वो (कोए) मेरी आवाज का उत्तर देते। इस तरह महीने भर में मेरी दोस्ती उनसे हो गई। और अब, जब भी मैं उन्हें इस मैदान में उसी आवाज में बुलाता हूं। तो, वो जरूर आते हैं।’

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.