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शिफ्ट नहीं हुई तो बंद करनी पड़ सकती है हमीदिया अस्पताल की कैथलैब, हृदयरोगियों के रुक जाएंगे आपरेशन

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भोपाल। राजधानी के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल की कैथ लैब बंद करने की तैयारियां चल रही है। अगर कैथलैब को पुराने भवन के टूटने की प्रक्रिया शुरू होने के पहले शिफ्ट नहीं किया गया तो उसे बंद करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो हृदयरोगियों को एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी समेत पेसमेकर लगाने जैसे बेहद गंभीर आपरेशन नहीं हो पाएंगे। ऐसे में यहां दो साल में 2000 से ज्यादा प्रोसीजर के लिए आने वाले मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा। वहीं, इलाज पर पैसा भी कई गुना अधिक पैसा चुकाना पड़ेगा।

पुराने भवन में ही चल रही कैथलैब

कार्डियोलाजी डिपार्टमेंट को नए भवन शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि कैथलैब पटेल वार्ड वाली पुराने भवन में ही चल रही है, जिसे तोड़कर ओपीडी भवन बनाया जाना प्रस्तावित है। उक्त भवन को तोड़ने का काम महीने भर में शुरू होना है। जबकि अभी तक कैथलैब को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई। यहां दिन-रात काम चलने से धूल उड़ेगी।

कैथलैब का संचालन संभव नहीं

कार्डियोलाजी डिपार्टमेंट के डाक्टर्स का कहना है कि ऐसे में कैथलैब का संचालन संभव नहीं होगा। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्चा कई गुना अधिक होगा। हमीदिया में कैथलैब बंद हुई तो इसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ेगा। कार्डियोलाजी विभाग में ओपीडी सबसे अधिक है। हमीदिया अस्पताल में सभी शल्य प्रक्रिया बेहद कम खर्च पर की जाती है, जबकि, निजी अस्पतालों में चार गुना तक मरीज को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। विभाग के चिकित्सकों की मानें तो इस संबंध में कई बार अधीक्षक और डीन से बात की, लेकिन उनकी ओर से कार्रवाई नहीं की गई।

कैथलैब में जनवरी में हुए आपरेशन- हमीदिया में खर्च – निजी में खर्च

  • एंजियोग्राफी – 4,000 – 15,000
  • एंजियोप्लास्टी – 33,000- 1,50,000
  • पेसमेकर – निश्शुल्क – 1,50,000
  • डिवाइस क्लोजर – 40,000 – 2,00,000
  • बेलून डयलेटेशन – 30,000 – 1,25,000
  • कार्डियक – 10,000 – 40,000

पुराने भवन का मेंटनेंस भी नहीं

अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद हमीदिया में चल रही कैथलैब के भवन का मैंटनेंस तक नहीं हो पा रहा है। इस पर ना तो अस्पताल प्रबंधन काम कर रहा है, ना ही पीडब्ल्यूडी विभाग से कोई सहयोग मिल पा रहा है। डाक्टर बताते हैं कि सुरक्षा नहीं होने के कारण एसी की बाहरी यूनिट का पंखा तक चोरी हो गया है, जिसमें सुधार तक नहीं किया जा रहा है।

अभी तो सब ठीक है, लेकिन जब पुराना भवन टूटेगा तो धूल से इसे प्रोटेक्ट कर पाना संभव नहीं होगा। ऐसे में कैथलैब को बंद करना पड़ सकता है। हालांकि अगर कोई व्यवस्थाएं नहीं होती हैं तो हम हमारी तरफ हरसंभव प्रयास करेंगे, जिससे लैब को बंद न किया जाए।

डा. राजीव गुप्ता, एचओडी, कार्डियोलाजी विभाग

सीधी बात डा. सलिल भार्गव, डीन गांधी मेडिकल कालेज

  • सवाल: कैथलैब पुराने भवन में है, अगर वहां टूट-फूट होगी तो धूल से परेशानी नहीं होगी?
  • जवाब: अभी दूसरा स्थान नहीं है, विभाग के लोगों ने खुद व्यवस्थाएं करने को कहा गया है।
  • सवाल: वो तो कह रहे हैं धूल उड़ी तो लैब को बंद करना पड़ेगा?
  • जवाब: बात अधीक्षक और कार्डियोलाजी विभाग के चिकित्सकों के बीच है, मैं इसकी जानकारी लेता हूं।
  • सवाल: आपको नहीं लगता कि लैब बंद हुई तो परेशानी बढ़ जाएगी ?
  • जवाब: मैं बुधवार को स्वयं जाकर स्थिति को देखता हूं, इसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।

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