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मप्र हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा मामले में बरकरार रखा अंतरिम आदेश

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जबलपुर । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में वह अंतरिम आदेश बरकरार रखा है जिसके तहत नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया गया था। बुधवार को प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष मामले की करीब दो घंटे सुनवाई हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने दो नवंबर को अंतिम सुनवाई करने के निर्देश दिए।

कई डीएलएड छात्रों ने याचिकाएं दायर की

हाई कोर्ट में वर्ष 2018 में हुई प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के तहत की गई नियुक्तियों को चुनौती देते हुए कई डीएलएड छात्रों ने याचिकाएं दायर की गई हैं। इसी के तहत अब सैकड़ों बीएड डिग्रीधारक उम्मीदवारों ने भी हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किए हैं।

अधिसूचना को चुनौती

जबलपुर निवासी रोहित चौधरी सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के दर्जनों डीएलएड छात्रों ने याचिका दायर कर एनसीटीई द्वारा 26 अगस्त, 2018 की उस अधिसूचना को चुनौती दी है जिसके तहत प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए बीएड डिग्रीधारकों को भी पात्र माना है।

यह दलील दी गई

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बीएड डिग्रीधारकों के लिए यह शर्त रखी गई है नियुक्ति के दो वर्ष के भीतर ऐसे शिक्षकों को एक ब्रिज कोर्स करना होगा।

दलील दी गई कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के तहत नियुक्ति के लिए काउंसलिंग जारी है। इसमें सैकड़ों बीएड डिग्री वालों को भी नियुक्ति दी जा रही है, जबकि अभी तक एनसीटीई ने ब्रिज कोर्स का सिलेबस भी निर्धारित नहीं किया है।

15 हजार बीएड डिग्रीधारकों को नियुक्ति

कोर्ट को बताया गया कि 28 हजार में से करीब 15 हजार बीएड डिग्रीधारकों को नियुक्ति दी गई है। प्राथमिक शिक्षक भर्ती में बीएड वालों को नियुक्ति देने से डीएलएड डिग्रीधारकों का हक मारा जाता है। हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट, नई दिल्ली व हिमाचल हाई कोर्ट ने बीएड डिग्रीधारियों की प्राथमिक शिक्षकों के रूप मे की गई नियुक्तियों को निरस्त किया गया है। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल, एनएस रूपराह सहित अन्य ने पक्ष रखा।

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