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अतरसुमा में 1410 आवासों का निर्माण नहीं हुआ पूरा, 750 हितग्राही नगर निगम के लगा रहे चक्कर

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मुरैना। मुरैना नगर निगम की आर्थिक हालत ठीक न होने से अधिकांश प्रोजेक्ट ठप पड़े हैं। आवास योजना के तहत मुरैना गांव में 144 गरीबों के लिए घर बनाए जा रहे हैं। इनका निर्माण अधूरा है और ऐसे में एक भी गरीब को आवास नहीं मिला है। अतरसुमा में भी 200 से ज्यादा आवास अधूरे पड़े हैं, जिनके लिए चयनित हितग्राही नगर निगम के लगातार चक्कर काट रहे हैं।

पीएम आवास योजना के तहत व अतरसुमा आवासीय योजना के तहत बनाई गई बहुमंजिला आवासीय कालोनी में कुल 1410 आवास हैं। इनमें 1116 ईडब्ल्यूएस आवास, 240 एलआइजी और 60 एमआइजी ग्रुप के आवास हैं। इस कालोनी में उन गरीब परिवारों को सरकारी अनुदान पर आवास दिए जाने हैं, जिनके पास खुद का घर नहीं। अभी तक 1200 से ज्यादा जरूरतमंदों ने यहां आवास खरीदे हैं, जिनमें से लगभग 350 परिवार यहां रहने भी पहुंच गए, लेकिन इन परिवारों को बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

इस कालोनी के आसपास कहीं स्कूल नहीं है, इसलिए बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। कालोनी से आधी से ज्यादा सड़कें कच्ची हैं, जो बारिश में कीचड़ का दलदल सा बन गई है। बिजली सप्लाई की हालत यह है कि 24 घंटे में से 10 घंटे ही बिजली मिल पाती है। अतरसुमा आवासीय कालोनी में कई बहुमंजिला इमारतों का काम अधूरा पड़ा है, इन्हें पूरा कराने के लिए निगम के पास बजट का अभाव है।

बजट को दूसरे कामों में कर दिया खर्च

निगम आयुक्त का तर्क है कि पूर्व के अफसरों ने इस काम के लिए आए बजट को दूसरे कामों में खर्च कर दिया। अब अधूरे पड़े कामों को पूरा कराने के लिए अतरसुमा आवासीय कालोनी में 240 एमआइजी और 60 एलआइजी आवासों को कालोनाइजरों को बेचने की तैयारी है। यह 300 आवास जिस हाल में हैं, उन्हें उसी हाल में बेच दिया जाएगा।

बानमोर और भोंडेरी में आबाद नहीं हुई कालोनी

मुरैना गांव व अतरसुमा की तरह कई और आवासीय परिसर हैं, जो शहर या कस्बे से दूर बना दीं, यह कालोनियां भी आबाद नहीं हो पा रही हैं। इनमें हाउसिंग बोर्ड ने मुरैना शहर के बाहर, शिवलालपुरा भोडेरी गांव में बनाई आवासीय कालोनी है, जिसमें 50 से ज्यादा आवास चार साल पहले बने थे, लेकिन एक भी गरीब परिवार यहां बसने को तैयार नहीं हुआ। इसी तरह बानमोर में भी हाउसिंग बोर्ड ने आवासीय कालोनी 10 साल पहले बनाई थी। इस कालोनी का एक भी घर बिक नहीं पाया, इसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने इसे लावारिश छोड़ दिया और कुछ दबंगों ने इन पर कब्जा कर आवासीय कालोनी के मकानों को किराए पर लगा दिया। करीब आठ महीने पहले हाउसिंग बोर्ड के अफसरों ने इन आवासों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।

आवासहीन काट रहे दफ्तरों के चक्कर

नगर निगम क्षेत्र के मुरैना गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 114 आवास बनाने का काम 2017 में शुरू हुआ। साल 2019 में इनका काम पूरा हो जाना था, लेकिन वर्तमान हालत यह है कि यहां एक भी आवास का काम पूरा नहीं हुआ। साल 2019 से ही आवास का निर्माण कर रही जयपुर की लक्ष्मीनारायण अग्रवाल कंपनी ने काम बंद कर दिया है। करीब 14 करोड़ रुपये इन प्रोजेक्ट की लागत है और बजट के अभाव में ननि अब काम पूरा नहीं कर पा रहा। 750 से ज्यादा आवासहीन परिवार ऐसे हैं, जो अतरसुमा और मुरैना गांव के आवासयी परिसरों में आवास लेने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं।

अगले महीने से शुरू होगा काम

मुरैना गांव के आवासीय परिसर का काम अगले महीने से शुरू करवा दिया जाएगा। चयनित हितग्राहियों को उनके घर सुपुर्द कर देंगे। अतरसुमा आवासीय परिसर के अधिकांश आवास पूरे हो चुके हैं, जिनका काम शेष है वह भी जल्द पूरा करवाया जाएगा।

प्रदीप सिंह जादौन कार्यपालन यंत्री, ननि मुरैना

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