बता दें कि जिला जेल में आठ माह पहले भोपाल से 20 कैदी आए थे। इन ज्यादातर कैदियों में जेल अधीक्षक प्रियदर्शन श्रीवास्तव ने कुछ खूबियां देखीं और उन्हें अलग-अलग कामों में जुटा दिया। सबसे पहले उन्होंने जेल परिसर की सफाई कराई। इसके बाद बागवानी का काम शुरू कराया, जब उन्हें लगा कि यह कैदी बागवानी का काम अच्छे से कर सकते हैं, तो उन्होंने वहां बेकार पड़ी जमीन पर बागवानी के साथ ही पार्क बनवाने का काम शुरू कराया।
कैदियों को मिलता है पारिश्रमिक
जेल अधीक्षक प्रियदर्शन श्रीवास्तव का कहना है कि जिन कैदियों में हुनर है, हम उनका लाभ ले रहे हैं। हमें छोटे-मोटे काम कराने अलग से मजदूरों को नहीं बुलाना पड़ता और कैदियों को भी कुछ पारिश्रमिक मिल जाता है।
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