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बाप-बेटी की खींचतान में मोहरा बन रहे सदाशिव

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पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता प्रेमचंद गुड्डू और उनकी बेटी रीना सेतिया बोरासी के बीच सांवेर विधानसभा से दावेदारी को लेकर कई दिनों से शीतयुद्ध चल रहा है। गुड्डू सांवेर से खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं या अपने बेटे अजीत को मैदान में उतारना चाहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ रीना को उम्मीदवार बनाने की पहले ही घोषणा कर चुके हैं। बाप-बेटी के बीच इस खींचतान में सबसे ज्यादा मरण कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव का हो रहा है। कमल नाथ ने यादव को स्पष्ट कह दिया है कि सांवेर से जुड़े कामों और फैसलों में वे रीना की बात ही सुने। प्रेमचंद गुड्डू, यादव के पुराने साथी है, दोनों ने कई चुनावों में साथ काम किया है, ऐसे में गुड्डू को नजरअंदाज करना यादव के लिए आसान नहीं है। यादव के सामने धर्मसंकट खड़ा हो गया है कि वे अपने नेता की सुने या मित्र की।

भाजपा के बड़े आयोजन में नजर क्यों नहीं आईं ताई?

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन 2019 के बाद से सक्रिय राजनीति से दूर थीं, पर हाल के दिनों में उनकी सक्रियता लगातार नजर आ रही है। वे कई कार्यक्रमों में शामिल हो रही हैं, लगातार बैठकें भी कर रही हैं। इसके साथ ही समय-समय पर भाजपा के नेता उनके घर पर मुलाकात के लिए भी आते-जाते रहते हैं। ऐसे में जब पिछले रविवार को इंदौर में भाजपा का बड़ा आयोजन था, जिसमें प्रदेश भर के तमाम बड़े नेता मौजूद थे, वहां ताई मौजूद नहीं थी। इंदौर की राजनीति में ताई और भाई (कैलाश विजयवर्गीय) के रिश्ते किसी से छिपे नहीं है। पार्टी के जिस आयोजन में पूर्व विधायकों से लेकर निगम मंडल के अध्यक्षों तक को मंच पर स्थान दिया गया हो, उस मंच पर ताई की गैरमौजूदगी कार्यकर्ताओं और शहर के प्रबुद्ध वर्ग में चर्चा का विषय बनी। उसी दिन सुबह ताई एक कार्यक्रम में पौधारोपण करती नजर आई थीं, यानी वे शहर में ही थीं।

गुरु सिंघ सभा में चुनाव से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप की चर्चा

इंदौर गुरु सिंघ सभा के चुनाव पिछले 10 साल के बाद होने जा रहे हैं, अभी भी चुनावों को लेकर संशय बना हुआ है। पिछले दिनों की चुनाव की तारीख को एक फिर आगे खिसकाया गया है। 10 साल पहले जब चुनाव हुए थे, तब दो ही गुट रिंकू भाटिया का खंडा पैनल और बाबी छाबड़ा का खालसा पैनल मैदान में थे। वर्तमान में तीन पैनल आमने-सामने आ सकते हैं। इस मोनू भाटिया का पैनल भी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। चुनाव भले ही सितंबर में होना हो, पर एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी से शुरू हो गया है। समाज के ही एक सदस्य सुमित सिंह मुटनेजा तो एक पैनल के उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के अयोग्य भी ठहरा दिया है। समाज के गुरुद्वारों में इन दिनों चुनाव से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोपों की गूंज सुनाई दे रही है।

और कमिश्नर मैडम ने एमआइसी सदस्यों को सुना दी खरी-खरी

जनप्रतिनिधि और अधिकारियों का टकराव अक्सर चलता रहता है। इंदौर नगर निगम में भी ये आए दिन दिखाई देता है। नगर निगम की पूर्व कमिश्नर प्रतिभा पाल की भी महापौर और पार्षदों से नहीं जम रही थी। अब नई कमिश्नर हर्षिका सिंह भी समय-समय पर जनप्रतिनिधियों को अपने तेवर दिखाती रहती हैं। पिछले दिनों महापौर परिषद के कुछ सदस्य अधिकारियों की शिकायत लेकर कमिश्नर मैडम के पास पहुंचे थे। सदस्यों का कहना था कि कांग्रेस पार्षदों के इलाकों में काम हो जा रहे हैं, पर हमारे काम अटकाए जा रहे हैं। इस पर कमिश्नर ने दो टूक कह दिया कि हमें तो सबके काम करने हैं, हम भाजपा-कांग्रेस दोनों को बराबर महत्व देते हैं। मैडम की खरी-खरी सुनने के बाद एमआइसी सदस्य मुंह लटकाए बाहर आ गए और खुसर-पुसर करने लगे कि अभी ये हाल है, तो यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं आई तो हमारा क्या होगा?

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