Chandrashekhar Azad Phulpur Rally: प्रयागराज में चंद्रशेखर आजाद का सरकार पर बड़ा हमला, समान शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर घेरा
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के अंतर्गत आने वाले फूलपुर में आजाद समाज पार्टी की तरफ से एक विशाल बूथ सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने शिरकत की और राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान संविधान की रक्षा, समान शिक्षा, रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और समाज के दबे-कुचले गरीबों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल उठाए। चंद्रशेखर ने कहा कि बहुजन समाज के लोगों का अपार स्नेह ही उन्हें लगातार संघर्ष करने की सबसे बड़ी ताकत प्रदान करता है। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर समेत तमाम बहुजन संतों और महापुरुषों को नमन करते हुए कहा कि आज वे जिस मंच पर अपनी बात रख पा रहे हैं, उसकी असली ताकत देश का संविधान है, जिसकी रक्षा के लिए हर नागरिक को हमेशा तैयार रहना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था और समान शिक्षा के अधिकार पर जोर
शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि शिक्षा वह ताकत है जो व्यक्ति को सशक्त बनाती है। उन्होंने बाबा साहब के प्रसिद्ध विचारों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जिसे जो भी पिएगा वह निश्चित रूप से दहाड़ेगा। उन्होंने मांग उठाई कि देश और प्रदेश में कक्षा एक से लेकर 12वीं तक की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त की जानी चाहिए तथा शिक्षा के क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कमजब कम 10 प्रतिशत हिस्सा खर्च करने पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब तक समाज के हर वर्ग के बच्चों को एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक समानता के अधिकार की कल्पना को धरातल पर साकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि देश के मंत्रियों, अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई भी अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही होनी चाहिए।
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता
महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को इन योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से पात्रों तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि वर्ष 2017 से ही महिलाओं को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती, तो आज जमीनी हकीकत कुछ और ही होती। इसके अलावा, उन्होंने राज्य की खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टरों का भारी अभाव है और मरीजों को अक्सर बाहर से महंगी दवाइयां लिखी जा रही हैं। उन्होंने आम जनमानस को सुलभ और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए सरकारी चिकित्सा व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की।
बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर सरकार को घेरा
प्रदेश की मौजूदा समस्याओं में सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी को बताते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि उच्च डिग्रियां हासिल करने के बाद भी राज्य के युवा नौकरी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली कथित धांधलियों, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) के सेंटर परीक्षार्थियों के गृह जिलों से बहुत दूर भेजे जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने करीब 79 हजार भर्तियों से जुड़े कथित घोटालों का मामला उठाते हुए सरकार से पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने पंचायत चुनावों में हो रही देरी, सरकारी विभागों के निजीकरण, राशन वितरण की गुणवत्ता और महिला-पुरुष के बीच वेतन असमानता जैसे ज्वलनशील मुद्दों को भी मंच से उठाया।
फूलपुर के ऐतिहासिक संघर्ष और पुलिस व्यवस्था पर सवाल
फूलपुर की ऐतिहासिक धरती का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इस पावन भूमि पर मान्यवर कांशीराम और उनके समकालीन महान नेताओं ने कड़ा संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले मजबूत कार्यकर्ता ही किसी भी राजनीतिक दल की असली पूंजी होते हैं। प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आज थानों में आम आदमी की एफआईआर दर्ज कराना बेहद कठिन हो गया है और पुलिस प्रशासन पर भारी राजनीतिक दबाव काम कर रहा है। उन्होंने सरकार पर अंधविश्वास और पाखंडवाद को बढ़ावा देने का भी गंभीर आरोप लगाया।
अमीरी-गरीबी की बढ़ती खाई और 2027 के चुनावों का जिक्र
अपने संबोधन के अंत में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि समाज में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है, जिसे पाटने के लिए गरीबों, किसानों और नौजवानों की समस्याओं का त्वरित समाधान होना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि अति पिछड़ी जातियों को उनका हक दिलाने के लिए ईडब्ल्यूएस (EWS) की तर्ज पर विशेष व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। पुलिसकर्मियों की व्यावहारिक समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने दोलहराया कि उनकी पार्टी संविधान और सामाजिक न्याय की हर लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। उन्होंने आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए सरकार को ललकारा और कहा कि जनता अब अपने सवालों के जवाब मांग रही है और शासकों को इसका हिसाब देना ही होगा।
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