दिल्ली हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान छात्र नेता नेहा बोरा के वकील ने रिजीम चेंज के नारे को सही ठहराया। बोरा की तरफ से कोर्ट में पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि रिजीम चेंज की बात करना गलत नहीं है। सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने इसका विरोध किया। एएसजी ने कहा कि दिल्ली का कोई उपद्रवी सत्ता में परिवर्तन नहीं कर सकता है, बदलाव सिर्फ वोट से होगा। लाइव लॉ के मुताबिक बहस के दौरान नेहा बोरा के वकील ने कहा कि बोरा को शांति भंग का नोटिस भेजा गया है। उसने अब तक ऐसा कोई भी कृत्य नहीं किया है, जिससे यह साबित हो। सरकार के पास कोई जांच रिपोर्ट नहीं है और मजिस्ट्रेट ने इस मामले में खुद जांच नहीं की है।
⚖️ दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व रख लिया है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि हम फैसला कल यानी 23 अक्टूबर को शाम 6 बजे सुनाएंगे। यह केस स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पीस बॉन्ड के खिलाफ दाखिल है। नेहा का कहना है कि इसे रद्द करने की जरूरत है।
🇮🇳 ‘तिरंगा फहराने के लिए परमिशन की जरूरत नहीं’
सुनवाई के दौरान नेहा बोरा के वकील ने कहा कि हमें राष्ट्रीय झंडा यानी तिरंगा फहराने के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं है, हम यह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर किया गया है। मंडी हाउस और जनपथ में मार्च निकालने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है। जिस मजिस्ट्रेट ने नेहा बोरा को नोटिस जारी किया है, वो खुद एक पुलिस अधिकारी (एसीपी) हैं। पुलिस की रिपोर्ट पर पुलिस के अधिकारी ही नोटिस जारी कर रहे हैं। वहीं दिल्ली पुलिस की तरफ से यह कहा गया कि नेहा बोरा दिल्ली में 12 बार प्रदर्शन कर चुकी है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि नेहा खुद या अपने वकील के मार्फत से पीस बॉन्ड भर दे।
🚨 ‘नेहा बोरा पर 6 FIR, इसे अनदेखा न किया जाए’
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि आप किसी को गलत ठहराकर कह रहे हैं कि आप सही होने का प्रमाण दो, वो भी बिना किसी ठोस सबूत के? यह तो संविधान के अनुच्छेद 21 का मामला बनता है। इस पर एएसजी ने कहा कि नेहा पर 6 एफआईआर हैं, इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि आपके पास जितने भी दस्तावेज हैं, उसे नेहा के वकील को दे दीजिए। इसके बाद हम इसे देखेंगे। कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला रिजर्व रख लिया है।
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