इस वक्त दुनिया का सबसे खूबसूरत देश सुलग रहा है और फ्रांस दंगों की राजधानी बन चुका है. यूरोप से उठी दंगों की यह आग अब अल्बानिया, इटली और बेल्जियम तक पूरी तरह फैल चुकी है, लेकिन इसका दायरा सिर्फ यूरोप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लैटिन अमेरिका से लेकर अफ्रीका महाद्वीप के कई देश भी इस भयानक जन-असंतोष की चपेट में आ चुके हैं. आग की एक छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते तीन महाद्वीपों में भूचाल ला दिया है. प्रदर्शन का नया केंद्र बने फ्रांस की सड़कों पर सुलगता गुस्सा सरहदें कब की पार कर चुका है, और इटली के मिलान से लेकर बेल्जियम के ब्रसेल्स तक सड़कें जल रही हैं.
📉 यूरोप में आर्थिक बदहाली का कहर: फ्रांस में 2400 गिरफ्तारियां, ऐतिहासिक इमारतों और स्टोरों में लूटपाट
अल्बानिया में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है, तो पुर्तगाल और स्पेन में महंगाई और आवास संकट ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. पूरा यूरोपीय महाद्वीप इस वक्त आर्थिक बदहाली और भारी जन-असंतोष के मुहाने पर खड़ा है, जहाँ दंगों का केंद्र बने फ्रांस में हालात बेहद भयावह हैं. फ्रांस में मचे बवाल के बीच लगभग 2,400 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और हिंसा में करीब 1,000 पुलिस अधिकारी घायल हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने लिमोगेस में 19वीं सदी के टाउन हॉल को आग के हवाले कर दिया तथा रोलेक्स, लुई वितॉ और यवेस सेंट लॉरेंट जैसे बड़े स्टोरों में जमकर लूटपाट की है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जहाँ दंगाइयों की कड़ी आलोचना कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अशांति के लिए इमिग्रेशन को जिम्मेदार ठहराया है.
🌎 अमेरिका और अफ्रीका महाद्वीप में भी फूटा जनसैलाब: महंगाई और बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
यूरोप के बाद अब अमेरिकी महाद्वीप भी इस वैश्विक असंतोष की चपेट में आ चुका है, जहाँ मेक्सिको से लेकर चिली और कोलंबिया तक सड़कों पर जनता का भारी सैलाब उमड़ रहा है. मेक्सिको में कार्टेल हिंसा और न्यायिक सुधारों के खिलाफ विरोध हो रहा है, तो चिली में महंगाई और पेंशन सुधार को लेकर छात्र और मजदूर यूनियनें आमने-सामने हैं. इसके अलावा, अफ्रीकी महाद्वीप भी ट्यूनीशिया, नाइजीरिया, कांगो, केन्या, मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका में राजनीतिक और आर्थिक कारणों से हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है. दक्षिण अफ्रीका और केन्या में बढ़ती महंगाई व ईंधन की कीमतों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है, जो इस बात का संकेत है कि दुनिया एक बड़े वैश्विक भूचाल की तरफ बढ़ रही है.
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