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Supreme Court Ruling: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला— बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल करना है मौलिक अधिकार

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इंटरनेट आज बच्चों की पढ़ाई, जानकारी और दुनिया से जुड़ने का अहम माध्यम बन चुका है. ऑनलाइन क्लास से लेकर डिजिटल लाइब्रेरी, नई स्किल सीखने और दोस्तों से बातचीत तक, बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया से जुड़ रहा है. लेकिन इसी इंटरनेट पर साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अश्लील कंटेंट और सोशल मीडिया की लत जैसे खतरे भी मौजूद हैं. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में बच्चों का इंटरनेट यूज करना मौलिक अधिकार है, और वे चाहे जिस उम्र के हों, उन्हें इसके प्रयोग से रोका नहीं जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख ऐसे समय आया है, जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र के आधार पर पाबंदी लगाने या डिजिटल सुरक्षा के नियम सख्त करने पर विचार कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट रखने पर रोक लागू है, जबकि ब्रिटेन भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. वहीं, चीन ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल के समय और कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए अलग व्यवस्था बनाई है. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों को इंटरनेट से दूर रखना सही है या उन्हें सुरक्षित तरीके से इसका इस्तेमाल करना सिखाना ज्यादा जरूरी है?

🌍 अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में क्या हैं बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल के नियम?

  • अमेरिका (बच्चों की निजी जानकारी की सुरक्षा पर जोर): अमेरिका में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए ‘चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट’ यानी COPPA लागू है. इसके तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लक्षित करने वाली वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं को बच्चों की निजी जानकारी जुटाने, इस्तेमाल करने या साझा करने के मामले में तय नियमों का पालन करना होता है. जनवरी 2025 में फेडरल ट्रेड कमीशन ने इसमें बदलाव कर बच्चों की जानकारी को थर्ड पार्टी के साथ साझा करने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं.

  • ब्रिटेन (16 साल से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया पर रोक की योजना): ब्रिटेन सरकार ने घोषणा की है कि वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया सेवाएं देने पर रोक लगाने की योजना बना रही है. इसके साथ गेमिंग जैसे दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीमिंग और अनजान लोगों के बच्चों से संपर्क करने जैसी जोखिम वाली सुविधाओं को भी सीमित करने की तैयारी है ताकि बच्चों को नुकसान से बचाया जा सके.

  • चीन (उम्र के हिसाब से स्क्रीन टाइम और कंटेंट पर नियंत्रण): चीन ने बच्चों के लिए मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने के लिए ‘माइनर मोड गाइडलाइन’ जारी की है. इसके मुताबिक 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दैनिक इस्तेमाल की सुझाई गई सीमा 1 घंटा और 16 से 18 साल के किशोरों के लिए 2 घंटे है. लगातार 30 मिनट इस्तेमाल के बाद ब्रेक का रिमाइंडर देने और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सेवा रोकने का प्रावधान है.

📚 भारत में बच्चों के लिए इंटरनेट की जरूरत और इसके फायदे

भारत के सामने चुनौती सिर्फ बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने की नहीं, बल्कि उन्हें इंटरनेट से मिलने वाले अवसर उपलब्ध कराने की भी है. ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कई बच्चों के लिए पढ़ाई की सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नई स्किल सीखने का माध्यम है. यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि इंटरनेट तक पहुंच की कमी बच्चों के डिजिटल कौशल और भविष्य के अवसरों को प्रभावित कर सकती है.

बच्चों के लिए इंटरनेट के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:

  1. पढ़ाई और जानकारी तक पहुंच: इंटरनेट के जरिए बच्चे ऑनलाइन क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और शैक्षणिक वीडियो का इस्तेमाल कर सकते हैं.

  2. नई स्किल सीखने का मौका: बच्चे कोडिंग, डिजाइन, भाषा और दूसरी डिजिटल स्किल सीख सकते हैं.

  3. दुनिया से जुड़ने का माध्यम: इंटरनेट के जरिए बच्चे परिवार, दोस्तों और अपनी रुचियों से जुड़े समुदायों के संपर्क में रह सकते हैं.

  4. विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए मदद: स्क्रीन रीडर और ऑडियो सामग्री जैसे टूल दिव्यांग बच्चों को पढ़ाई और संवाद में मदद कर सकते हैं.

⚠️ इंटरनेट इस्तेमाल करने से बच्चों को क्या नुकसान हो सकते हैं?

  1. मानसिक स्वास्थ्य पर असर: साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और नुकसानदेह कंटेंट का सामना करने वाले बच्चों में चिंता और मानसिक परेशानी का जोखिम अधिक होता है.

  2. नींद और पढ़ाई प्रभावित होना: रात में देर तक फोन इस्तेमाल करने और लगातार वीडियो स्क्रॉल करने से नींद का समय कम हो सकता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है.

  3. साइबर बुलिंग और ऑनलाइन शोषण: बच्चों को इंटरनेट पर धमकी, अपमानजनक संदेश, ऑनलाइन ग्रूमिंग और यौन शोषण जैसे खतरों का सामना करना पड़ सकता है.

  4. अनुचित कंटेंट और लत का खतरा: हिंसक वीडियो और सोशल मीडिया के लगातार स्क्रॉलिंग वाले फीचर कुछ बच्चों में नियंत्रण कम कर सकते हैं.

कुल मिलाकर बच्चों के लिए इंटरनेट न पूरी तरह वरदान है और न अपने आप में खतरा. उसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चे को क्या देखने को मिल रहा है और जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन के लिए उसके पास कौन मौजूद है.

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