Rewa BJP Politics: रीवा के त्योंथर में बीजेपी नेताओं की आपसी खींचतान आई सामने, लोकार्पण कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी भड़के
रीवा: विंध्य क्षेत्र में बीजेपी खेमे में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच चल रही आपसी खींचतान और नाराजगी अब खुलकर सार्वजनिक मंचों पर सामने आने लगी है। इसका ताजा और बड़ा मामला त्योंथर विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। गुरुवार को आयोजित एक तहसील कार्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान पूर्व बीजेपी विधायक श्याम लाल द्विवेदी ने शुरुआत में तो मंच साझा किया, लेकिन कुछ ही देर बाद वह अचानक पूरी तरह भड़क उठे। मंच पर अपने अपमान का गंभीर आरोप लगाते हुए पूर्व विधायक ने सबके सामने वर्तमान बीजेपी विधायक सिद्धार्थ तिवारी को खरी-खोटी सुनाई।
🗣️ शिलापट्टिका में नाम न होने पर भड़के पूर्व विधायक, जमकर हुई नारेबाजी
लोकार्पण कार्यक्रम में स्थानीय बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा भी विशेष रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान शुरू हुई पूजा-अर्चना के वक्त पूर्व विधायक श्याम लाल द्विवेदी वहाँ पहुँचे और त्योंथर के वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी पर चिल्लाते हुए कहने लगे, “आप खुलेआम अपमान कर रहे हैं, आप यहाँ अपमान करने के लिए आए हैं। कलेक्टर भी अपमान कर रहे हैं। मैं एक पूर्व विधायक हूँ और चुपचाप शांत नहीं बैठूँगा। मंच पर रखी कुर्सी पर मेरा नाम नहीं लिखा है और शिलापट्टिका में भी मेरा नाम गायब है। बड़े विधायक बन गए हो, लेकिन यह जनता मेरी है और त्योंथर इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”
पूर्व विधायक को गुस्से में उबलते देख उनके समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में दूसरे पक्ष की तरफ से भी हूटिंग और नारेबाजी होने लगी। दोनों ही पक्षों के कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। बिगड़ते हालात को काबू में करने के लिए सांसद जनार्दन मिश्रा खुद आगे आए और उन्होंने पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी को समझा-बुझाकर शांत कराने का प्रयास किया, तब जाकर किसी तरह मामला शांत हुआ।
🎙️ “क्या इस तरह से मेरा अपमान करना उचित है?” – पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी
घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व विधायक श्याम लाल द्विवेदी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “कुछ वर्ष पूर्व ही इस तहसील कार्यालय का भूमिपूजन हुआ था। अब हैरानी की बात यह है कि यह पूरी तरह सरकारी काम था, जिसमें प्रभारी मंत्री को आना था और मुख्यमंत्री ने भी शिलापट्टिका लगाने के निर्देश दिए थे। सुबह एसडीएम ने मुझे बताया था कि शिलापट्टिका लगा दी गई है, लेकिन भवन निर्माण पूरा होने के बाद उसे बदल दिया गया। अब जिसकी भी इतनी घटिया और संकीर्ण मानसिकता रही होगी, उसी ने ऐसा निर्देश दिया होगा। जनता ने मुझे हराया नहीं बल्कि अपना भरपूर आशीर्वाद दिया है। पार्टी ने किसी तकनीकी कारणवश मुझे इस बार अवसर नहीं दिया, जिसकी तकलीफ मुझे जरूर है, लेकिन मैंने दिल से पार्टी प्रत्याशी को जिताने का काम किया था। क्या इस तरह से मेरा सार्वजनिक अपमान करना उचित है?”
⚖️ विधायक सिद्धार्थ तिवारी की प्रतिक्रिया और उनका राजनीतिक सफर
इस पूरे विवाद और हंगामे को लेकर त्योंथर के विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने सीधे तौर पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा, “इस भव्य तहसील के लोकार्पण के अवसर पर मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से धन्यवाद देता हूँ। त्योंथर क्षेत्र में लगातार विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। जहाँ तक त्योंथर को जिला बनाने की बात है, तो यह मेरी राजनीतिक महत्वाकांक्षा या लालच नहीं, बल्कि त्योंथर की जनता के प्रति मेरा अटूट समर्पण है।”
आपको बता दें कि बीजेपी विधायक सिद्धार्थ तिवारी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. पंडित श्रीनिवास तिवारी के पौत्र हैं और गुढ़ के पूर्व विधायक रहे सुंदरलाल तिवारी के सुपुत्र हैं। सिद्धार्थ ने वर्ष 2019 में कांग्रेस के टिकट पर रीवा लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, जिसमें वे बीजेपी उम्मीदवार जनार्दन मिश्रा से हार गए थे। इसके बाद, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। पार्टी ने उन्हें त्योंथर से टिकट दिया और वे चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे, जिसके चलते पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी का टिकट कट गया था।
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