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India Maritime Strategy: इंडो-पैसिफिक में भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम, AIME-2026 से मजबूत हुआ समुद्री सुरक्षा नेटवर्क

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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और सामरिक समीकरणों के बीच भारत अपनी समुद्री रणनीतिक पहुंच (मैरिटाइम स्ट्रैटेजिक आउटरीच) को निरंतर सशक्त बना रहा है।

इसी दीर्घकालिक रणनीति के तहत फिलीपींस के सुबिक बे में आसियान-भारत समुद्री अभ्यास (AIME-2026) का सफल आयोजन किया गया।

इस बहुपक्षीय अभ्यास में भारतीय नौसेना के दो अग्रिम पंक्ति के स्वदेशी युद्धपोतों—INS सह्याद्रि और INS कुलिश ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। इस युद्धाभ्यास में दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (ASEAN) के सदस्य देशों की नौसेनाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

⚓ साझा साझेदारी और इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर: किसी देश के खिलाफ नहीं, सुरक्षा समन्वय है मुख्य लक्ष्य

रणनीतिक उद्देश्य और क्षेत्रीय सहयोग का प्रारूप:

  • रणनीतिक महत्व: दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के दौर में फिलीपींस जैसे रणनीतिक साझेदार देशों के साथ भारत का नौसैनिक तालमेल बेहद अहम माना जा रहा है।

  • शांति और समन्वय का संदेश: रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AIME-2026 किसी देश विशेष के विरुद्ध केंद्रित युद्धाभ्यास नहीं है, बल्कि इसका औपचारिक उद्देश्य भारत और आसियान देशों के बीच आपसी समझ, ऑपरेशनल समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को प्रगाढ़ करना है।

  • साझेदारियों का विस्तार: भारतीय नौसेना का मुख्य ध्यान केवल पारंपरिक अभ्यासों तक सीमित न रहकर मित्र राष्ट्रों के साथ मिलकर एक व्यापक व विश्वसनीय समुद्री सुरक्षा नेटवर्क स्थापित करने पर केंद्रित है।

  • ADMM-Plus में सहभागिता: इसी कड़ी में भारतीय नौसैनिक जहाजों ने हाल ही में फिलीपींस में आयोजित ADMM-Plus मैरीटाइम सिक्योरिटी अभ्यास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

🚁 हार्बर फेज से सी फेज तक सघन ड्रिल: HADR और क्रॉस-डेक ऑपरेशंस से परखी गई तैयारी

अभ्यास के चरणों और तकनीकी गतिविधियों का ब्योरा:

  • हार्बर फेज (Harbour Phase): इस चरण के दौरान विभिन्न नौसेनाओं के विषय विशेषज्ञों के बीच संवाद, ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन और टेबल-टॉप एक्सरसाइज के जरिए साझा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) पर विस्तृत कार्य किया गया।

  • सी फेज (Sea Phase): समुद्र में खुले जलक्षेत्र के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR), विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजर (VBSS), और गतिमान जहाजों के बीच ईंधन आपूर्ति (Underway Replenishment) की जटिल ड्रिल्स की गईं।

  • आपातकालीन क्षमता: इसके अलावा क्रॉस-डेक हेलिकॉप्टर लैंडिंग और आपातकालीन हताहत निकासी (CASEVAC) का अभ्यास किया गया, ताकि संकट अथवा प्राकृतिक आपदा के समय सभी भागीदार नौसेनाएं त्वरित और प्रभावी तरीके से संयुक्त अभियान संचालित कर सकें।

🌐 हिंद महासागर से परे भारत की ब्लू-वॉटर नौसैनिक क्षमता: अटलांटिक और भूमध्यसागर तक उपस्थिति

विस्तृत समुद्री विजन और रक्षा नेतृत्व का रुख:

  • वैश्विक समुद्री उपस्थिति: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि भारतीय युद्धपोतों की निरंतर उपस्थिति अब केवल हिंद महासागर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साउथ चाइना सी, भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर तक विस्तारित हो चुकी है।

  • ब्लू-वॉटर नेवी की पहचान: यह व्यापक पहुंच भारतीय नौसेना की उच्चस्तरीय ‘ब्लू-वॉटर क्षमता’ और दूरस्थ जलक्षेत्रों में प्रभावी मिशन संचालन की सामर्थ्य को दर्शाती है।

  • समेकित सुरक्षा संरचना: समुद्री मार्गों की सुरक्षा में आ रही जटिलताओं को देखते हुए भारत अब क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को लगातार मजबूत कर रहा है।

🧭 ‘एक्ट ईस्ट’ से लेकर ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन तक: साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान

विदेश नीति और क्षेत्रीय संतुलन का समग्र विश्लेषण:

  • नीतिगत समन्वय: AIME-2026 युद्धाभ्यास भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और व्यापक ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Maritime Heads for Active Security and Growth for All in the Region) विजन का व्यावहारिक क्रियान्वयन है।

  • व्यावहारिक सहयोग: इसका मुख्य ध्येय आसियान देशों के साथ वास्तविक समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना और जलक्षेत्र में पैदा होने वाली साझा सुरक्षा चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटना है।

  • संतुलित कूटनीति: भारत किसी आक्रामक सैन्य गुट का हिस्सा बनने के बजाय साझेदार देशों के साथ तकनीकी क्षमता, आपसी विश्वास और अंतर-संचालनीयता का ऐसा मजबूत ताना-बाना तैयार कर रहा है, जो बदलते वैश्विक समुद्री शक्ति-संतुलन में देश की कूटनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करता है।

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