Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
देश की पहली LNG ट्रेन को अमित शाह ने दिखाई हरी झंडी: गुजरात को मिली ₹1,542 करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट्... Assam Politics News: आशुतोष रांका को असम पुलिस ने लिया हिरासत में, CJP का आरोप- 'सच्चाई सामने लाने स... दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा पर लगा गंभीर आरोप: सड़क निरीक्षण के दौरान युवक को थप्पड़ मारने का वीडि... NEET पेपर लीक विवाद के बाद NTA का बड़ा फैसला: नए मुख्यालय में तैनात होंगे CISF जवान दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को 214 करोड़ की सौगात: 53 विकास कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया शिलान्यास जयपुर में सनसनीखेज वारदात: महिला की हत्या कर गार्डन में दफनाया शव, आरोपी मकान पर ताला लगाकर फरार Jaipur Crime News: झोटवाड़ा के मंदिर में 63 वर्षीय पुजारी से मारपीट, कपड़े फाड़े; CCTV में कैद हुई व... मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ CJP का हल्लाबोल: 2 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन, सोनम वांगचुक का ... Bihar Railway Negligence: जमुई में रेल प्रशासन की अमानवीयता, ट्रैक पर कौवे नोचते रहे शव; परिजनों ने ... LPU Student Protest: जालंधर लवली यूनिवर्सिटी में कथित रेप की अफवाह पर भारी बवाल, पुलिस वाहन फूंका; S...

Israel Hamas War: गाजा में मौतों का आंकड़ा 74,000 के पार, सीजफायर के बीच इजराइल में नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट हुआ विपक्ष

4

यरूशलम/गाजा: लगभग तीन साल से जारी इजराइल-हमास युद्ध में फिलिस्तीनियों की मौतों का आंकड़ा 74,000 की संख्या को पार कर गया है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 74,016 हो चुकी है, जबकि गंभीर रूप से घायलों की तादाद 1,75,068 तक पहुंच गई है।

यद्यपि 10 अक्टूबर को प्रभावी हुए युद्धविराम (सीजफायर) समझौते के बाद बड़े पैमाने पर भीषण जमीनी संघर्ष में कमी आई है, फिर भी इजराइली सैन्य हमले पूरी तरह से नहीं थमे हैं। इजराइली सेना का दावा है कि ये छिटपुट हमले संभावित खतरों अथवा उकसावे की जवाबी कार्रवाई के तौर पर किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यह विनाशकारी युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को तब आरंभ हुआ था, जब हमास के नेतृत्व में लड़ाकों ने दक्षिणी इजराइल में अचानक हमला कर लगभग 1,200 लोगों की जान ले ली थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया था।

🕊️ सीजफायर के बाद भी हजारों परिवारों में मातम: समझौते की शर्तें अधर में लटकीं

युद्धविराम के जमीनी प्रभाव और हताहतों का विवरण:

  • सीजफायर के बाद की मौतें: गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक 1,145 फिलिस्तीनी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां आमतौर पर इस मंत्रालय के डेटा रिकॉर्ड को विश्वसनीय मानती हैं।

  • महिलाओं और बच्चों पर मार: हालांकि यह आंकड़ा आम नागरिकों और लड़ाकों के बीच भेद नहीं करता, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार कुल मृतकों में लगभग आधी संख्या निर्दोष महिलाओं और बच्चों की है।

  • इजराइली सैनिकों का नुकसान: इस समयावधि में संघर्ष के दौरान इजराइल के 7 सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है।

  • अधर में लटका समझौता: अमेरिका की मध्यस्थता से तय हुए युद्धविराम के बुनियादी उद्देश्य अभी पूरे नहीं हो सके हैं। इजराइली सेना ने गाजा पट्टी के 50 प्रतिशत से अधिक भूभाग पर अपना नियंत्रण बना रखा है, हमास ने हथियार नहीं डाले हैं, किसी नई प्रशासनिक व्यवस्था का गठन नहीं हुआ है और पुनर्निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है।

  • नेतन्याहू का अड़ियल रुख: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास पूरी तरह आत्मसमर्पण कर हथियार नहीं छोड़ देता, तब तक इजराइली रक्षा बल (IDF) अपने कदम पीछे नहीं हटाएगा।

🗳️ अगले महीने नेतन्याहू की राजनीतिक अग्निपरीक्षा: विपक्षी दलों ने बनाया साझा मोर्चा

इजराइली राजनीति में बड़ा फेरबदल और चुनावी सुगबुगाहट:

  • नेतन्याहू को हराने की रणनीति: आंतरिक मतभेदों के लिए आलोचना झेल रहीं इजराइल की मुख्य यहूदी विपक्षी पार्टियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर आगामी महीने होने वाले आम चुनावों में नेतन्याहू के गठबंधन को सत्ता से बेदखल करने का साझा संकल्प लिया है।

  • सुरक्षा चूक पर जनमत संग्रह: 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद यह पहला राष्ट्रीय मतदान होगा, जिसे देश की जनता द्वारा सुरक्षा एजेंसियों व सरकार की विफलता पर एक बड़े जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के रूप में देखा जा रहा है।

  • दिग्गज विपक्षी नेता एक मंच पर: इस उच्चस्तरीय विपक्षी बैठक में नेतन्याहू के सबसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वी व पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट, पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट, पूर्व प्रधानमंत्री यायर लैपिड, सेंटर-लेफ्ट के नेता यायर गोलान और कट्टर विपक्षी नेता एविगडोर लिबरमैन शामिल हुए।

  • भविष्य की सरकार का खाका: विपक्षी गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे मतदान प्रतिशत बढ़ाने, भ्रामक प्रचार (फेक न्यूज) का मुकाबला करने और भावी सरकार के बुनियादी सिद्धांतों को तय करने के लिए मिलकर काम करेंगे। उनका मानना है कि यह चुनाव इजराइल राज्य के अस्तित्व और भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.