Pakur-Dhuliyan Road: पुठीमारी ब्रिज का एप्रोच रोड धंसा, बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल से भारी वाहनों का व्यापार ठप
पाकुड़ (झारखंड): झारखंड को पश्चिम बंगाल, बिहार और पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से जोड़ने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण पाकुड़-धुलियान मुख्य मार्ग पर पुठीमारी ब्रिज का एप्रोच रोड धंसने से यातायात बुरी तरह बाधित हो गया है।
इस प्रमुख मार्ग से खनिज संपदाओं के साथ-साथ दैनिक उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों और बांग्लादेश तक होती है। भारी बारिश के चलते एप्रोच रोड के दोनों किनारों के धंस जाने के कारण सुरक्षा कारणों से भारी मालवाहक वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर का व्यापार ठप पड़ गया है।
🚛 भारी वाहनों की आवाजाही बंद: पत्थर ढुलाई और दैनिक खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति संकट में
परिवहन एवं व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित:
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मालवाहक वाहनों पर रोक: सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के चलते पत्थर चिप्स, बोल्डर और अन्य खनिज ले जाने वाले ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं।
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सप्लाई चेन पर असर: पाकुड़ जिले से पश्चिम बंगाल, बिहार और बांग्लादेश को होने वाली नियमित आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
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किल्लत की आशंका: व्यवसायियों और ट्रक मालिकों का कहना है कि यदि यह मार्ग शीघ्र चालू नहीं हुआ, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में फल, सब्जी और दैनिक उपभोग की आवश्यक सामग्रियों की भारी किल्लत हो सकती है।
🌧️ लगातार हो रही बारिश से मरम्मत में बाधा: पश्चिम बंगाल के एनएच अधिकारी कार्य में जुटे
मरम्मत कार्य और मैदानी स्थिति:
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मरम्मत का प्रयास: राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग से जुड़े पश्चिम बंगाल के अभियंताओं और तकनीकी कर्मियों ने एप्रोच रोड को चलने योग्य बनाने के लिए मिट्टी भराव और बोल्डर पिचिंग का काम प्रारंभ कर दिया है।
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मौसम की मार: क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते सड़क पर जलभराव और फिसलन बढ़ गई है, जिससे मरम्मत कार्य की गति धीमी पड़ रही है।
🏗️ बड़ा पुल और मजबूत गार्डवॉल बनाने की मांग: स्थानीय चालकों ने रखी स्थायी समाधान की बात
स्थानीय लोगों और चालकों का पक्ष:
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हर साल की समस्या: इस रूट से नियमित गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि हर मानसून में पुठीमारी पुल के दोनों सिरों की सड़क धंस जाती है, जिससे बड़ा जोखिम बना रहता है।
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स्थायी निर्माण की मांग: लोगों ने मांग की है कि यहां सड़क के दोनों तरफ कंक्रीट की मजबूत गार्डवॉल का निर्माण कराया जाए या फिर पुल का विस्तार कर इसे एक बड़े पुल में तब्दील किया जाए ताकि इस वार्षिक संकट से निजात मिल सके।
⚠️ कमजोर मिट्टी और भार क्षमता की कमी बना कारण: कार्यपालक अभियंता विनंत कुंडू ने दी जानकारी
तकनीकी कारण और एनएचएआई का रुख:
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भूगर्भीय स्थिति: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कार्यपालक अभियंता विनंत कुंडू ने बताया कि इस क्षेत्र की मिट्टी की प्रकृति खराब है। हल्की बारिश में भी मिट्टी की पकड़ ढीली पड़ जाती है और वह भारी वाहनों का भार वहन करने में असमर्थ हो जाती है।
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रूट डायवर्जन का विकल्प: उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है; आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन से विचार-विमर्श कर कुछ दिनों के लिए मार्ग को पूर्णतः बंद (ब्लॉक) करके सघन मरम्मत कराई जाएगी।
📑 स्थायी समाधान के लिए केंद्र को भेजा गया DPR: एनएच-34 से जुड़ा है यह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कॉरिडोर
रणनीतिक महत्व और भविष्य की योजना:
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डीपीआर प्रेषित: कार्यपालक अभियंता ने पुष्टि की कि इस हिस्से के स्थायी समाधान के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी गई है। स्वीकृति और बजट आवंटन होते ही सड़क का स्थायी व सुदृढ़ पुनर्निर्माण किया जाएगा।
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रणनीतिक संपर्क: पाकुड़-धुलियान मार्ग आगे चलकर सीधे एनएच-34 (NH-34) से जुड़ता है। यह मार्ग मुर्शिदाबाद, नदिया, वर्धमान, कोलकाता, मालदा, कटिहार, पूर्णिया, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, गंगटोक के साथ-साथ असम, मणिपुर, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक व्यापारिक आवागमन की रीढ़ माना जाता है।
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