Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal UCC Bill Draft: पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता की तैयारी, ड्राफ्ट कमेटी की पहली बैठ... Punjab News: CM भगवंत मान की रैली में काले कपड़े दिखाने वाले युवक का पुलिस पर गंभीर आरोप, सुखबीर बाद... जंतर-मंतर पर मारपीट मामले में गरमाई राजनीति, CJP ने उठाई हत्या के प्रयास के तहत कार्रवाई की मांग Happy Teachers Day Gifting Guide: डायरी-पेन से लेकर डेस्क प्लांट्स तक, टीचर्स डे के लिए बेस्ट बजट-फ्... जन्माष्टमी पर ऐसे बनाएं कान्हा का प्रिय पंचामृत, जानें सही विधि और भोग नियम ITR में टाइपिंग मिस्टेक पर नहीं लगेगा टैक्स, ITAT मुंबई का 9.6 लाख के नोटिस पर ऐतिहासिक फैसला Tech News Updates: व्हाट्सऐप पर आया बिल पेमेंट फीचर, NPCI के रिकॉर्ड UPI आंकड़ों के बीच मेटा ने लॉन्... एक ब्लॉगर के खुलासे से हिला चीन का विज्ञान जगत: NSFC ने शुरू की फर्जी रिसर्च की देशव्यापी जांच Box Office Report 2026: यश की 'टॉक्सिक' पर भारी पड़ी 'हनुमान अंश', बनी साल की सबसे ज्यादा प्रॉफिट कम... हेनरी क्रोकोम्ब का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐतिहासिक कारनामा: लगातार दो मैचों में ली दो हैट्रिक

जन्माष्टमी पर ऐसे बनाएं कान्हा का प्रिय पंचामृत, जानें सही विधि और भोग नियम

3

सनातन धर्म में भाद्रपद माह के पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यदि आप भी अपने घर में बाल-गोपाल के प्राकट्योत्सव को विधि-विधान से मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो 4 सितंबर को पूरे नियम और निष्ठा के साथ यह महापर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, अभिषेक और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रभु को प्रसन्न करने के लिए सही विधि से तैयार किया गया पंचामृत और पारंपरिक भोग अर्पित करना अनिवार्य माना गया है।

🧈 माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और तुलसी दल: बालकृष्ण के प्रिय भोग और पूजन के नियम

ठाकुर जी के प्रिय नैवेद्य और आवश्यक नियम:

  • माखन-मिश्री का भोग: प्रभु श्रीकृष्ण को बाल्यकाल से ही ताजा माखन और मिश्री अत्यंत प्रिय है; अतः इसके बिना जन्मोत्सव की पूजा अधूरी मानी जाती है।

  • धनिया पंजीरी: जन्माष्टमी पर पारंपरिक रूप से धनिया, देसी घी, सूखे मेवे और बूरे से तैयार की गई पंजीरी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।

  • तुलसी दल अनिवार्य: भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रत्येक प्रसाद और भोग में तुलसी पत्र (तुलसी दल) रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि मान्यताओं के अनुसार तुलसी दल के बिना लड्डू गोपाल भोग स्वीकार नहीं करते।

🥛 पंचामृत निर्माण हेतु आवश्यक सामग्री: 5 अमृत तत्वों का सही अनुपात

अभिषेक और प्रसाद के लिए आवश्यक शुद्ध सामग्रियां:

  • गाय का कच्चा दूध: 1 कप ताजा और शुद्ध कच्चा दूध।

  • ताजा दही: 1/2 कप घर का जमाया हुआ ताजा दही।

  • शुद्ध देसी घी: 1 छोटा चम्मच गाय का शुद्ध घी।

  • प्राकृतिक शहद: 1 छोटा चम्मच शुद्ध शहद।

  • शर्करा/बूरा: 1 से 2 चम्मच बूरा अथवा पिसी हुई मिश्री/चीनी।

  • पवित्रता संवर्धन: 5 से 7 ताजे तुलसी के पत्ते और कुछ बूंदें पवित्र गंगाजल।

🥣 पंचामृत तैयार करने की प्रामाणिक विधि: अभिषेक और भोग के नियम

चरणबद्ध और शास्त्रसम्मत विधि:

  • पात्र का चयन: पंचामृत तैयार करने के लिए सदैव चांदी, कांसे अथवा शुद्ध मिट्टी के पात्र का उपयोग करें।

  • मिश्रण प्रक्रिया: सर्वप्रथम पात्र में ताजा दही और कच्चा दूध डालकर हल्के हाथों से मिलाएं। इसके पश्चात देसी घी, शहद और बूरा/मिश्री डालकर चम्मच से अच्छी तरह एकसार करें।

  • गंगाजल और तुलसी: अंत में मिश्रण में पवित्र गंगाजल और तुलसी के पत्तों को धोकर मिलाएं।

  • अभिषेक एवं वितरण: सबसे पहले इस पंचामृत से मध्यरात्रि 12 बजे लड्डू गोपाल का शंख से महाअभिषेक करें, तत्पश्चात इसे भोग के रूप में अर्पित कर परिवार और श्रद्धालुओं में चरणामृत/प्रसाद के रूप में वितरित करें।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.