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लातेहार में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सरहुल सरना स्थल: निर्माण के 2 साल में ही भरभराकर गिरी मंडप की छत, ग्रामीणों में रोष

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लातेहार (झारखंड): राज्य सरकार द्वारा आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, किंतु धरातल पर कई योजनाएं घटिया निर्माण और कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं।

ताजा मामला लातेहार सदर प्रखंड अंतर्गत जड़ेयांग गांव से सामने आया है, जहां आदिवासी आस्था के प्रतीक सरहुल सरना स्थल की घेराबंदी और मंडप का निर्माण महज दो वर्ष पूर्व कराया गया था। संवेदक और विभागीय अनदेखी के चलते यह नवनिर्मित मंडप दो साल के भीतर ही पूरी तरह भरभराकर जमींदोज हो गया।

🏚️ जड़ेयांग में सरहुल सरना स्थल की छत गिरी: ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

घटिया निर्माण और ग्रामीणों का आक्रोश:

  • गुणवत्ता पर पूर्व में भी उठे सवाल: लातेहार के ग्रामीण अंचलों में सरना स्थल, मसना स्थल और देवस्थलों के जीर्णोद्धार के नाम पर संचालित अधिकांश योजनाएं शुरू से ही विवादों में घिरी रही हैं।

  • अनसुनी रहीं शिकायतें: जड़ेयांग के ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान ही सामग्री की खराब गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी, परंतु ठेकेदार व अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

  • कार्रवाई की मांग: घटिया काम के चलते छत ढहने के बाद अब ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने और गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराने की मांग उठाई है।

😡 जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने किया निरीक्षण: बोले- ‘कल्याण विभाग में मची है लूट’

जनप्रतिनिधि के आरोप और प्रशासनिक विफलता:

  • मौके का मुआयना: मंडप गिरने की सूचना मिलते ही जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव जड़ेयांग पहुंचे और ध्वस्त स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया।

  • कल्याण विभाग पर तीखा हमला: उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि कल्याण विभाग द्वारा संचालित अधिकांश योजनाएं भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही हैं। आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति और राशि की बंदरबांट की गई है।

  • शिकायतों पर लीपापोती: विनोद उरांव ने बताया कि उन्होंने पहले भी कई बार जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी थीं, किंतु जनप्रतिनिधि के पत्रों पर भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया।

  • अधूरी व दिखावटी सुविधाएं: उन्होंने उजागर किया कि परिसर में चापाकल (हैंडपंप) के नाम पर मजाक किया गया है और दरवाजा भी सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करने के लिए लगाया गया था। अन्य योजनाओं की जांच होने पर बड़े घपले सामने आ सकते हैं।

📋 जिला कल्याण पदाधिकारी का बयान: फाइल मंगाकर कराई जाएगी जांच

विभागीय प्रतिक्रिया और आगामी कदम:

  • दस्तावेजों की समीक्षा: पूरे मामले पर जिला कल्याण पदाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि योजना से संबंधित अभिलेख और फाइलें मंगवाकर यह देखा जाएगा कि कार्य आधिकारिक रूप से पूर्ण घोषित था या नहीं।

  • उचित कार्रवाई का भरोसा: उन्होंने आश्वस्त किया कि स्थल की तकनीकी जांच कराई जाएगी और यदि निर्माण में लापरवाही व अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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