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हजारीबाग की सोहराय कलाकार पुतली गंझू सम्मानित: 5000 साल पुरानी लोक कला को विदेशों में दिलाई पहचान, मिला लाइफटाइम अवार्ड

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हजारीबाग (झारखंड): विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर संपूर्ण झारखंड में ‘झारखंड आदिवासी महोत्सव’ अत्यंत हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में हजारीबाग जिले में भी एक विशेष भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान जनजातीय समाज के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने समाज व कला-संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। इनमें हजारीबाग की प्रसिद्ध सोहराय आर्टिस्ट (Sohrai Artist) पुतली गंझू प्रमुख रूप से शामिल हैं। पुतली गंझू ने हजारीबाग की 5000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन पारंपरिक लोक कला ‘सोहराय’ को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने में ऐतिहासिक एवं निर्णायक भूमिका निभाई है।

🏆 भारत सरकार से ‘लाइफटाइम कंट्रीब्यूशन अवार्ड’ पाने वाली एकमात्र सोहराय कलाकार, 45 से अधिक सम्मान दर्ज

पुतली गंझू को कला के क्षेत्र में अतुलनीय समर्पण हेतु अब तक 45 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पुरस्कारों से अलंकृत किया जा चुका है।

पुतली संपूर्ण झारखंड राज्य की एकमात्र ऐसी सोहराय चित्रकार हैं, जिन्हें जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs, भारत सरकार) की ओर से ‘लाइफटाइम कंट्रीब्यूशन अवार्ड’ (Lifetime Contribution Award) प्रदान किया गया है। पुतली गंझू ने अपनी अथक निष्ठा और निरंतर कड़े परिश्रम के बल पर इस विलुप्तप्राय लोक कला को वैश्विक ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

🎨 “मां से सीखी थी कला, विरोध के बाद भी नहीं मानी हार”: पुतली गंझू ने बयां किया संघर्ष

अपनी कलात्मक यात्रा का स्मरण करते हुए पुतली गंझू बताती हैं कि उन्होंने सोहराय कला की बारीकियां अपनी माताजी से सीखी थीं।

प्रारंभिक दिनों में वे जंगलों में विचरण करने वाले पशु-पक्षियों, प्रकृति और पेड़-पौधों से प्रेरित होकर अपने कच्चे घर की दीवारों पर चित्र उकेरा करती थीं। उस दौर में परिवार व समाज के लोगों ने उनके इस कार्य का विरोध भी किया, किंतु उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और सोहराय कला की महक को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने का अपना संकल्प जारी रखा।

🌍 कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और इटली तक सोहराय कला की गूंज, गुस्ताव इमाम ने की सराहना

सोहराय कला के संरक्षण पर दीर्घकाल से कार्य कर रहे पद्मश्री बुलु इमाम के सुपुत्र गुस्ताव इमाम ने जानकारी देते हुए बताया कि पुतली देवी ने कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी तथा इटली सहित कई विकसित देशों का भ्रमण कर हजारीबाग की सोहराय चित्रकला का प्रदर्शन किया है और उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बल पर भारत को विश्व में एक नई पहचान दिला रहा है। आदिवासी समुदाय की जीवनशैली, खान-पान, भाषा, वेशभूषा, रीतियां और परंपराएं अन्य सभी समाजों से अत्यंत विशिष्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल हैं।

👏 डीडीसी रिया सिंह ने दी शुभकामनाएं, कहा— “देश के विकास में आदिवासी समाज का योगदान अविस्मरणीय”

पुतली देवी के कला के प्रति अटूट समर्पण और हजारीबाग की लोक संस्कृति को वैश्विक आयाम देने पर हजारीबाग की उप विकास आयुक्त (DDC) रिया सिंह ने उन्हें हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

डीडीसी रिया सिंह ने रेखांकित किया कि देश के सर्वांगीण विकास, स्वतंत्रता संग्राम से लेकर वर्तमान आधुनिक युग तक आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत गौरवशाली एवं अविस्मरणीय रहा है।

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