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मुजफ्फरपुर कोर्ट का बड़ा धमाका: “फौरन DSP को अरेस्ट करो!” आदेश को हल्के में लेना पड़ा भारी, 11 अन्य पुलिसवालों की भी बढ़ी मुसीबतें

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने गवाही के लिए बार-बार समन जारी होने के बावजूद उपस्थित नहीं होने पर तत्कालीन पुलिस लाइन डीएसपी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.

यह आदेश विशेष एनडीपीएस कोर्ट-2 के न्यायाधीश नरेंद्र पाल सिंह ने दिया है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कड़ी कार्रवाई की. बताया गया कि कुढ़नी और सदर थाना क्षेत्र से जुड़े मादक पदार्थ जब्ती के दो अलग-अलग मामलों में संबंधित पुलिसकर्मियों को गवाही के लिए अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन बार-बार तलब किए जाने के बावजूद वे कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे. इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी.

इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी

जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है, उनमें तत्कालीन कुढ़नी थानाध्यक्ष अरविंद पासवान, तत्कालीन डीएसपी (रक्षित) विपिन नारायण शर्मा, अनुसंधानकर्ता दारोगा विवेकानंद सिंह, एसआई प्रकाश कुमार, गृह रक्षक कुमोद कुमार, दिनेश चौधरी और रघुवीर सिंह शामिल हैं. इसके अलावा आईओ राजेश कुमार यादव, सिपाही छोटेलाल सिंह, संजीव कुमार, गृह रक्षक अरविंद कुमार और धनिक कुमार राणा के नाम भी वारंट सूची में शामिल हैं.

अदालत ने स्पष्ट कहा है कि दोनों मामलों में पुलिसकर्मियों की गवाही बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके लगातार अनुपस्थित रहने से मुकदमों की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है. इसलिए न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए यह सख्त कदम उठाना पड़ा.

क्या है मामला?

पहला मामला कुढ़नी थाना क्षेत्र के गरहुआ चौक से जुड़ा है. इस मामले में पुलिस ने रौशन कुमार नामक युवक को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार उसके पास से 1.920 मिलीग्राम स्मैक बरामद की गई थी. इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी और इसके बाद साक्ष्य की प्रक्रिया शुरू होनी थी. हालांकि, गवाह के रूप में नामित पुलिसकर्मी बार-बार समन के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं हुए.

दूसरा मामला सदर थाना क्षेत्र के खबड़ा भेल कॉलोनी से जुड़ा है. अगस्त 2020 में पुलिस ने एटीएम फ्रॉड करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया था. छापेमारी के दौरान पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से एक किलो चरस, एटीएम क्लोनिंग मशीन और नकदी बरामद की गई थी. इस मामले में एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है.

लेकिन इस केस में भी करीब पांच साल बीत जाने के बाद भी संबंधित पुलिसकर्मी गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं. इससे मुकदमे की सुनवाई लंबित पड़ी हुई है. अदालत ने दोनों मामलों में गवाही से बचने पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि तब तक सभी आरोपित पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए, ताकि मामलों की सुनवाई आगे बढ़ सके. सभी को 9 मार्च तक गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है.

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