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कोई भी हिंदू बन सकता है RSS प्रमुख…” नागपुर में मोहन भागवत का बड़ा एलान, अंग्रेजी भाषा के इस्तेमाल पर जताई अपनी राय

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने पर देशभर के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में मुंबई में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताया कि संघ का प्रमुख कोई भी बन सकता है. हां जो भी बनेगा वह हिंदू ही होगा.

संघ प्रमुख ने कहा कि अंग्रेजी से हमारा कोई बैर नहीं है. जहां अंग्रेजी के बिना काम नहीं चलता है. वहां हम अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं. हमारा प्रयास रहता है कि अपनी मातृभाषा या फिर हिन्दी भाषा का ही प्रयोग करें.

उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजी भाषा कभी भी RSS का हिस्सा नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है. अंग्रेजी का इस्तेमाल तभी किया जाएगा जब जरूरी होगा. हिंदी जैसी भारतीय भाषाएं बहुत ज़रूरी हैं और RSS सिर्फ़ भारतीय भाषाओं का ही इस्तेमाल करेगा.

संघ नहीं चलाता सरकार- भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने साफ किया कि संघ सरकार नहीं चलाता है. उन्होंने कहा कि RSS और BJP अलग हैं. प्रोपेगेंडा खत्म, स्वयंसेवक कहीं भी हों पर संगठन का राजनीति से सीधा वास्ता नहीं है. संघ ने पहले से तय किया हुआ कि समाज के अलावा कोई और दूसरा काम नहीं करना है. संघ के पास केवल एक ही काम है वह समाज को एक करना है.

कोई भी बन सकता है संघ प्रमुख- मोहन भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई के कार्यक्रम के कहा कि संघ का प्रमुख कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता है. कोई क्षत्रिय नहीं बन सकता, कोई अन्य जाति का नहीं बन सकता है. हां लेकिन जो कोई भी संघ का प्रमुख बनेगा वह हिन्दू ही होगा. मतलब साफ है कि संघ में किसी जाति का होने से कोई मतलब नहीं है. सब लोग समान हैं.

उन्होंने आगे कहा कि संघ में दायित्व से नियुक्ति होती है, न कि कार्य से, दायित्व से नियुक्त होने के बाद भी संघ का काम जीवन भर चलता रहता है. सक्रियता भी शरीर की सक्रियता तब तक बनी रहती है.उन्होंने कहा कि नियुक्ति की कोई निश्चित पद्धति नहीं है, यह व्यक्ति की योग्यता और आवश्यकता के आधार पर की जाती है.

आगे कहा कि पहले संघ का काम एक ही बस्ती में शुरू हुआ था. उस समय पदाधिकारी ब्राह्मण थे, जिससे लोगों को लगता था कि यह ब्राह्मणों का संघ है. लेकिन, अब संघ का काम बढ़ गया है और यह भौगोलिक क्षेत्र में बढ़ाया जा रहा है, न कि जाति या वर्ग के आधार पर इसको बढ़ाया जा रहा है.

परिस्थिति का विचार नहीं, काम कैसे करना है इस पर होता है विचार- संघ प्रमुख

मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों का विचार करने से फायदा नहीं है, बल्कि हमें उन परिस्थितियों में कैसे काम करना है, इसका विचार करना चाहिए. आपने कहा है कि परिस्थितियां तो आती और जाती हैं, लेकिन हमें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए उन परिस्थितियों में कैसे काम करना है, इसका विचार करना चाहिए.

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