Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु... पूर्णिया में बदल रही गांवों की तस्वीर: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 281 परिवारों का बिजली बिल हु... हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में डूबने से चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियो... संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर भदोही बना 'संत रविदास नगर', सीएम योगी ने की सांस्कृतिक पुनर्स्थाप... बिहार विधान परिषद में बड़ा उलटफेर: बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के ... असम के शिलचर में बड़ा हादसा: पानी की टंकी की सफाई के दौरान दम घुटने से 4 लोगों की मौत; इलाके में शोक कटनी में 11 साल पुरानी जर्जर सड़क का केक काटकर मनाया जन्मदिन! कांग्रेस का प्रशासन के खिलाफ अनोखा विर...

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर जमात-ए-इस्लामी हिंद की गंभीर चिंता; देशवासियों से की शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील

24

जमात-ए-इस्लामी हिंद ने देश में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, सर्दियों में ग़रीबों की परेशानी और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित टारगेटेड हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है. जमात ने 2026 को न्याय, शांति, एकता, समावेशी और स्थायी विकास का साल बनाने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की.

शनिवार (3 जनवरी) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमात के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि भारत हमेशा से एक बहुत धार्मिक देश रहा है, जिसकी सह-अस्तित्व और सांप्रदायिक सद्भाव की एक समृद्ध विरासत है. उन्होंने कहा, ‘हमारे धार्मिक नेताओं और संस्थानों ने विविधता में एकता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है. हालांकि, यह विरासत खतरे में है’. उन्होंने सांप्रदायिक बयानबाजी, कथित इस्लामोफोबिया, नफरती बयान, मॉब लिंचिंग और धार्मिक भेदभाव में वृद्धि पर गहरी चिंता जताई.

साउथ एशिया जस्टिस कैंपेन के 2025 के इंडिया पर्सेक्यूशन ट्रैकर का हवाला देते हुए प्रोफ़ेसर इंजीनियर ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ अत्याचारों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिसमें गैर-कानूनी हत्याएं, भीड़ हिंसा, मनमानी गिरफ्तारियां, बदले की भावना से तोड़फोड़, बड़े पैमाने पर नफरत फैलाने वाले बयान और देश से जबरन निष्कासन शामिल हैं. उन्होंने बताया कि एक बड़ी आतंकी घटना के बाद ये पैटर्न और तेज हो गए, जिससे जवाबी कार्रवाई, गौ-रक्षा और सुरक्षा खतरों जैसे बहाने बनाकर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं.

‘राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का गलत इस्तेमाल’

प्रोफेसर इंजीनियर ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ ताकतें सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के ज़रिए धार्मिक समुदायों के बीच खाई पैदा करके राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का गलत इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने समाज की नैतिक ताकत पर भरोसा जताते हुए कहा, ‘हमें लगता है कि भारत के लोगों में इतनी ताकत और समझ है कि वो हमारे देश में सांप्रदायिक ताकतों को हरा सकें और उन पर काबू पा सकें’.

सलीम इंजीनियर ने की अपील

सलीम इंजीनियर ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी हिंद धार्मिक जन मोर्चा और सद्भावना मंच जैसी इंटरफेथ और शांति की पहलों के ज़रिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि ये प्लेटफॉर्म लोगों को एक साथ लाने, बातचीत करने, एक-दूसरे को समझने और एकता के पुल बनाने में बहुत मददगार रहे हैं.उन्होंने घोषणा की कि इन कोशिशों को और तेज करने के लिए जमात ने 2026 को सभी के लिए न्याय, शांति, एकता और समावेशी स्थायी विकास का वर्ष बनाने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की है.

ठंड में गरीबों की मदद कर रहा जमात

सर्दियों की परेशानी पर बात करते हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद के दूसरे उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि जमात समान वैचारिक संगठनों के साथ मिलकर उत्तरी और पूर्वी भारत में बड़े पैमाने पर कंबल बांटने के अभियान चलाकर गरीब और बेघर लोगों की सक्रिय रूप से मदद कर रही है. उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे और अपर्याप्त बसेरा में रहने वाली कमजोर आबादी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों को धर्म, जाति या बैकग्राउंड की परवाह किए बिना गर्म कंबल दिए जा रहे हैं.

उन्होंने भारत सरकार से सर्दियों के दौरान सक्रिय और मिलकर कार्रवाई करने का आग्रह किया, जिसमें नाइट शेल्टर बढ़ाना, गर्म कपड़े बांटना, गर्म खाना देना, मोबाइल हेल्थ यूनिट तैनात करना और शुरुआती चेतावनी सिस्टम को मजबूत करना शामिल है.उन्होंने नागरिकों से भी दान, स्वंय-सेवा और सामुदायिक देखभाल के ज़रिए योगदान देने की अपील की ताकि सर्दियों की कठोर परिस्थितियों में कोई भी असुरक्षित न रहे.

ईसाई समुदायों के खिलाफ हिंसा पर जताई चिंता

मलिक मोतसिम खान ने भारत के अलग-अलग इलाकों में ईसाई समुदायों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा और उत्पीड़न में बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि हम संकट की इस घड़ी में ईसाई समुदाय के साथ हैं. उन्होंने आगाह किया कि अगर प्रार्थना सभाओं में रुकावट, दफनाने से जुड़े विवाद और धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत आरोपों जैसी घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो इससे चिंता और अविश्वास का माहौल बन सकता है.

एंजेल चकमा की लिंचिंग की निंदा

खान ने त्रिपुरा के एक MBA छात्र एंजेल चकमा की लिंचिंग की भी कड़ी निंदा की. उन्होंने इसे नस्लीय भेदभाव पर आधारित नफरती अपराध और नॉर्थ ईस्ट के नागरिकों के साथ लगातार भेदभाव और उन्हें पृथक करने का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे हमले समाज की नाकामी और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कमजोरियों को उजागर करते हैं, जिससे असामाजिक तत्वों को लगता है कि उनका कोई कुछ नहीं कर सकता.

निर्णायक कदम उठाने की मांग

निर्णायक कदम उठाने की मांग करते हुए जमात के उपाध्यक्ष ने उत्तराखंड सरकार से जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, कठोरतम कानूनी प्रावधान लागू करने, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा करने एवं न्याय के साथ ही मुआवजे की गारंटी देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सबसे बढ़कर, भारत को नस्लीय और नफरत पर आधारित हिंसा के खिलाफ एक व्यापक राष्ट्रीय कानून की सख्त ज़रूरत है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.